swami sanand, professor G D Aggarwal

स्वामी श्री ज्ञानस्वरूप सानंद
20.07.1932 – 11.10.2018

स्वामी श्री ज्ञानस्वरूप सानंद जी नहीं रहे। गंगा की अविरलता की मांग करने वाला सबसे मुखर और तार्किक स्वर शांत हो गया।

स्वामी श्री सानंद की मृत्यु पर प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी का ट्वीट सिर्फ एक दिखावा मात्र है  असलियत यह है कि स्वामी श्री सानंद मरे नहीं, अपितु हिंदू धर्मसत्ता और राजसत्ता के शीर्ष पदधारकों के बीच बनी इस आपसी सहमति का शिकार हो गए कि स्वामी सानंद को अब मर ही जाने दिया जाए। नागरिक समाज भी किंकर्तव्यविमूढ़ बना रहा।

स्वामी श्री सानंद ने अपने गंगा अनशन के एक मौके पर कहा,

’’लोगों को मेरे शरीर की तो चिंता है, लेकिन मां गंगा की नहीं।’’

राज, समाज और धर्माचार्यों का यह रवैया ही असल ज़िम्मेदार है स्वामी श्री सानंद की मृत्यु का। मां गंगा की नित बिगड़ती दशा और हमारे इस रवैये को देखते हुए ही स्वामी श्री सानंद ने मन ही मन ठान लिया था; उन्होने कहा भी,

’’जब मैं मेरी मां गंगा के लिए कुछ कर ही नहीं पा रहा…कोई सुन ही नहीं रहा तो इस शरीर को व्यर्थ क्यों ढोना।….फिर जन्म हुआ तो फिर गंगा की सेवा करुंगा।’’

अपनी देह से अधिक मां गंगा की चिंता करने वाले ऐसा गंगापुत्र विरला ही हो सकता है। पूर्व में प्रो श्री गुरुदास अग्रवाल के नाम से सुविख्यात ऐसे विरले गंगापुत्र की पुण्यात्मा को पानी पोस्ट टीम की ओर से कोटिशः नमन।

वीडियो साभार : jagritbihar
वीडियो साभार : jagritbihar
वीडियो साभार : jagritbihar

पढ़ें अब तक का सबसे लम्बा साक्षात्कार

स्वामी श्री सानंद के पिछले अनशन के अंतिम दिनों में पानी पोस्ट के लेखक श्री अरुण तिवारी द्वारा लंबी बातचीत की गई थी। 22 कड़ियों में प्रस्तुत यह बातचीत स्वामी सानंद की जीवन यात्रा की एक झलक तो देती ही है, जीवन और गंगा के प्रति उनके नज़रिए को भी सामने रखती है। पानी पोस्ट टीम अपने पाठकों के लिए पुनः प्रस्तुत कर रही है। पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

  1. स्वामी सानंद गंगा संकल्प संवाद श्रृंखला: एक परिचय 
  2. स्वामी सानंद गंगा संकल्प संवाद – प्रथम कथन
  3. क्या मैं भागीरथी का सच्चा बेटा हूं ?
  4. “यह मेरे लिए दूसरा झटका था”: स्वामी सानंद
  5. आदेश पर अपील से स्पष्ट हुई मिलीभगत – स्वामी सानंद
  6. भिक्षा, जलत्याग और भागीरथी इको सेंसेटिव ज़ोन
  7. अलकनंदा के लिए नया चोला, नया नाम, नया प्रभार
  8. गंगा तप की राह चला सन्यासी सानंद
  9. स्वामी सानंद गंगा संकल्प संवाद – नौवां कथन
  10. जाओ, मगर सानंद नहीं, जी डी बनकर – अविमुक्तेश्वरानंद
  11. ”मेरी कैलकुलेशन गलत निकली” : स्वामी सानंद
  12. नहर, पाइप वाटर सप्लाई, बांध और वन विनाश हैं समस्या
  13. इंजीनियरिंग में हमेशा विकल्प है : स्वामी सानंद
  14. लोग सुविधा हेतु वोट देते हैं, पर्यावरण हेतु नहीं : स्वामी सानंद
  15. स्वामी सानंद: परिवार और यूनिवर्सिटी ने मिल गढ़ा गंगा व्यक्तित्व
  16. छात्र जी डी की विद्रोही स्मृतियां
  17. स्वामी सानंद: नौकरियां छोङी, पर दायित्वबोध नहीं
  18. मेरा सबसे वाइड एक्सपोजर तो इंस्टीट्युशन्स के साथ हुआ: स्वामी सानंद
  19. साधुओं ने गंगाजी के लिए क्या किया ? : स्वामी सानंद
  20. अविवाहित सानंद की पारिवारिक दृष्टि
  21. मेरा देहदान हो, श्राद्ध नहीं : स्वामी सानंद
  22. उमा जी सामने होती, तो गर्दन पकङ लेता : स्वामी सानंद