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आज का लेख

आज का लेख, नदी लेख, समय विशेष

मकर सक्रान्ति

आइये, मकर संक्रान्ति को फिर से सम्यक क्रान्ति मंथन पर्व बनायें; जिन नदियों के किनारे जुटते हैं, उनकी ही नहीं, राज-समाज और संतों की अविरलता-निर्मलता सुनिश्चित करने का पर्व। यह कैसे हो ?

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आज का लेख, जलतरंग, समय विशेष

नव वर्ष 2019 की हार्दिक शुभकामना

अन्धकार की बातें करते बीत गए यूं साल भतेरे। तुमने जाने क्या सोचा है
मैंने तो बस यह सोचा है
एहसासों की दुनिया में मैं
अब कदम रखूंगा धीरे-धीरे।
नई कहानी कुछ लिख दूंगा
कुछ लिखूंगा पानी-सानी
राहगीर बन कुछ लिख दूंगा
इस जमीर पर नई दीवानी।
कोई जाने या न माने
नहीं रखूंगा कलम पैताने …

तुमने भी कुछ सोचा होगा
तुम भी रुस्तम छिपे घनेरे
अपनी खातिर नहीं सही पर
मेरी खातिर ही बतलाओ

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आज का लेख, पानी लेख, समय विशेष

द्वितीय अनुपम व्याख्यान (22 दिसम्बर, 2018) : एक रिपोर्ट

मैं, जैसलमेर ज़िले के रामगढ़ के पास…पिता का नाम कर्ण सिंह…” नपे-तुले शब्द, किंतु पूरी तरह सहज और सरल। अपने पूर्वजों के नाम बताने शुरु किए तो इतनी पीढ़ियां और इतने पेशे गिना गए कि एक ऐसा सामाजिक विन्यास प्रस्तुत हो गया, जिसमें पेशागत् भेदभाव की कोई गुंजाइश ही न थी।……….बचपन में पढ़ा था कि ऊंट एक सप्ताह तक पानी नहीं पिता था। बकरी 100 दिन तक बिना पानी पीये रह सकती है। मैने सोचा, यह कैसे संभव है ? ——–जो नहीं जोतते, वे भी आज अपनी ज़मीन को समाज की ज़मीन मानते हैं। इस उदारता को समझता हूं तो कई पृष्ठ खुलते हैं।

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आज का लेख, समय विशेष

द्वितीय अनुपम स्मृति (19 दिसम्बर, 2018) : एक रिपोर्ट

नदी, पानी और जीवन के नैतिकता पहलुओं पर छाई वर्तमान छंई को देखते हुए कह सकते हैं कि धुआ मिश्रित इस धुंध के बीच यदि सवेरा लाना है तो हमें अनुपम साहित्य और उनके जीवन के कथा-चित्रों को खंगालना ही पडे़गा।

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आज का लेख, पानी लेख, समय विशेष

अनुपम स्मृति ( 22 दिसम्बर, 2018 ) : एक आयोजन, एक पुस्तक

अरुण तिवारी एक आयोजन 19 दिसम्बर, 2016 को पानीदार कलम वाले श्री अनुपम मिश्र जी की देह पंचतत्वों में विलीन हुई। 22 दिसम्बर, 1947 – स्वर्गीय श्री अनुपम मिश्र जी की जन्म तिथि है। गत् वर्ष 2017 में गांधी स्मृति एवम् दर्शन समिति ने प्रथम अनुपम व्याख्यान का आयोजन किया…

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a flowering plant
आज का लेख, जलतरंग, पानी लेख, प्रकृति लेख

पानी प्रणय पक्ष

लेखक : अरुण तिवारी आतुर जल बोला माटी सेमैं प्रकृति का वीर्य तत्व हूं,तुम प्रकृति की कोख हो न्यारी।इस जगती का पौरुष मुझमें,तुममें रचना का गुण भारी।नर-नारी सम भोग विदित जस,तुम रंग बनो, मैं बनूं बिहारी।आतुर जल बोला माटी से…. न स्वाद गंध, न रंग तत्व,पर बोध तत्व है अनुपम…

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rakshasootra aandolan, women led movement
आज का लेख, जलतरंग, प्रकृति लेख

मैं देवदार का घना जंगल

लेखक: अरुण तिवारी मैं देवदार का घना जंगल,गंगोत्री के द्वार ठाड़ा,शिवजटा सा गुंथा निर्मलगंग की इक धार देकर,धरा को श्रृंगार देकर,जय बोलता उत्तरांचल की,चाहता सबका मैं मंगल,मैं देवदार का घना जंगल… बहुत लंबा और ऊंचा,हिमाद्रि से बहुत नीचा,हरीतिमा पुचकार बनकर,खींचता हूं नीलिमा को,मैं धरा के बहुत नीचे, सींचता हूं खेत को…

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आज का लेख, नदी लेख

स्वामी सानंद इसलिए चाहते थे अविरल गंगा

अरुण तिवारी गंगा की अविरलता की मांग को पूरा कराने के लिए स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ने अपने प्राण तक दांव पर लगा दिए। इसी मांग की पूर्ति के लिए युवा साधु गोपालदास आगे आये और अब इस लेख को लिखे जाने के वक्त तक मातृ सदन, हरिद्वार के सन्यासी आत्मबोधानन्द और…

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आज का लेख

स्वामी सानंद के आत्मकथ्य पर आधारित शीघ्र प्रकाश्य हिंदी पुस्तक

ख़ास परिचितों के बीच ‘जी. डी.’ के संबोधन से चर्चित सन्यासी स्वर्गीय स्वामी श्री ज्ञानस्वरूप सानंद के गंगापुत्र होने के बारे में शायद ही किसी को संदेह हो। बकौल श्री नरेन्द्र मोदी जी, वह भी गंगापुत्र हैं। ”मैं आया नहीं हूं, मुझे मां गंगा ने बुलाया है।” – वर्ष 2014…

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