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जलतरंग

आज का लेख, जलतरंग

आज के सवाल हैं कि आज ही जवाब दो…..

——————————————————————————————————————— रचनाकार: अरुण तिवारी ————————————————————————————————————————- जल रही मशाल है कि उठ रहे सवाल हैं कि आज के सवाल हैं  कि आज ही जवाब दो। नदी जिये या जल मरें,बची रहे श्री सदा ऐसा भी कमाल हो, सत्ता ही दलाल हों, तो क्यों न ईमान पे सवाल हो ? जल रही मशाल…

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आज का लेख, जलतरंग

गंगा तट से बोल रहा हूं

तय अब हमको ही करना है… स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (प्रो जी डी अग्रवाल जी ) के गंगा अनशन (वर्ष 2013) पर छाई चुप्पी से व्यथित होकर अनशन के 100वें दिन श्री अरुण तिवारी द्वारा किया गया एक अत्यंत मार्मिक आहृान हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं। कृपया पढ़े और गंगाजी…

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खुशखबरी : स्कूल-स्कूल पहुंचा ‘मां भारती की जलगान’

मां भारती का जलगान’ शीर्षकयुक्त गीत पानी पोस्ट के लेखक श्री अरुण तिवारी द्वारा लिखी एक ऐसी रचना है, जो जल चक्र, जल संरक्षण की भारतीय परंपरा से लेकर जल के महत्व के चित्रलेख को अत्यंत सरलता और सहजता से प्रस्तुत करती है। जल एवम् स्वच्छता मिशन, राजस्थान सरकार की…

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गंगा प्रश्न

लेखक: अरुण तिवारी ऐ नये भारत के दिन बता……ए नदिया जी के कुंभ बता !!उजरे-कारे सब मन बता !!!क्या गंगदीप जलाना याद तुम्हेया कुंभ जगाना भूल गये ?या भूल गये कि कुंभ सिर्फ नहान नहीं,गंगा यूं ही थी महान नहीं ।नदी सभ्यतायें तो खूब जनी,पर संस्कृति गंग ही परवान चढी।नदियों…

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कोयला ढोर

लेखक: अरुण तिवारी एक दिन मेरे गांव   पाकुङ में भी आया विकास साथ लाया एक लंबी काली-सर्पीली सङक खास, जो बांट गई पानी पाट गई पोखर लील गई खेत बना गई हमें कामचोर। फिर आये कतार दर कतार ट्रक ही ट्रक  सिखा गये बेईमानी बना गये  कोयला ढोर। अब हर रोज…

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मां भारती का जलगान

लेखक: अरुण तिवारी जयति जय जय जल की जय होजल ही जीवन प्राण है।यह देश भारत….सागर से उठा तो मेघ घनाहिमनद से चला नदि प्रवाह।फिर बूंद झरी, हर पात भरीसब संजो रहे मोती – मोती।।है लगे हजारों हाथ,यह देश भारत…..कहीं नौळा है, कहीं धौरा हैकहीं जाबो कूळम आपतानी।कहीं बंधा पोखर…

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