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नदी लेख

आज का लेख, नदी लेख, समय विशेष

स्वामी सानंद का गंगा स्वप्न, सरकार और समाज

लेखक : अरुण तिवारी 20 जुलाई, 1932 को जन्मे प्रो. गुरुदास अग्रवाल जी ने 11 अक्तूबर, 2018 को अपनी देहयात्रा पूरी की। वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ज़िला मुजफ्फरनगर के कांधला में जन्मे। उत्तराखण्ड के ज़िला ऋषिकेश के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में उन्होने अंतिम सांस ली।  उनकी एक पहचान ‘जी डी’…

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आज का लेख, जलतरंग, नदी लेख, पानी लेख, प्रकृति लेख

न्यू इण्डिया के नारे के बीच पानी, खेती और शहरों की तसवीर तथा बाजार व सरकार के रवैये को सामने रखती एक कविता

यह न्यू इण्डिया है…रचनाकार : अरुण तिवारी 1.  पानी बूंदा है, बरखा है,पर तालाब रीते हैं।माटी के होंठ तक कई जगह सूखे हैं।भूजल की सीढ़ी के नित नये डण्डे टूटे हैं।गहरे-गहरे बोर नेकई कोष लूटे हैं।शौचालय का शोर भी कई कोष लूटेगा।स्वच्छ नदियों का गौरव बचा नहीं शेष अब,हिमनद के आब तकपहुंच गई आग आज,मौसम की चुनौतीघर…

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आज का लेख, नदी लेख, पानी लेख, प्रकृति लेख

समाज का प्रकृति एजेण्डा जगाती एक पुस्तक

पुस्तक का नाम: समाज, प्रकृति और विज्ञान लेखक:श्री विजयदत्त श्रीधर, श्री राजेन्द्र हरदेनिया, श्री कृष्ण गोपाल व्यास, डाॅ. कपूरमल जैन, श्री चण्डी प्रसाद भट्टसंपादक: श्री राजेन्द्र हरदेनियाप्रकाशक: माधवराव सप्रे स्मृति समाचारप संग्रहालय, एवम् शोध संस्थान, माधवराव सप्रे मार्ग (मेन रोड नंबर तीन), भोपाल (म.प्र.) – 462003संपर्क :  फोन: 0755-2763406 / 4272590,…

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गंगोत्री के हरे पहरेदारों की पुकार

लेखक: सुरेश भाई एक ओर ‘नमामि गंगे’  के तहत् 30 हजार  हेक्टेयर भूमि पर वनों के रोपण का लक्ष्य है तो दूसरी ओर गंगोत्री से हर्षिल के बीच हजारों हरे देवदार के पेडों की हजामत किए जाने का प्रस्ताव है। यहां जिन देवदार के हरे पेडों को कटान के लिये…

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NAPM निमंत्रण : ‘मुक्त बहने दो’ पुस्तक विमोचन तथा उत्तराखंड में भूमि का सवाल पर चर्चा

जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, उत्तराखंड                     कंडी खाल, पो0 आ0 कैम्पटी वाया मसूरी, टिहरी गढवाल, उत्तराखंड–248179      09718479517, 9927145123 निमंत्रण 10 जून, 2017 शनिवार   समय- 11 बजे से 3.30 तकस्थान- जैन धर्मशाला, निकट प्रिंस चौक, देहरादून, उत्तराखंड  प्रिय साथी , जिंदाबाद!!    बांध परियोजनाओं को उत्तराखंड में विकास के लिये प्रचारित किया गया है। पर्यावरण…

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arun tiwari and river ganga
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गंगा तट से बोल रहा हूं : अरुण तिवारी

हंसा तो तैयार अकेला , तय अब हम को ही करना है  स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (प्रो जी डी अग्रवाल जी ) के गंगा अनशन (वर्ष 2013) पर छाई चुप्पी से व्यथित होकर अनशन के 100वें दिन श्री अरुण तिवारी ने एक अत्यंत मार्मिक आहृान किया था। मातृ सदन के स्वामी…

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यकायक इतनी चुनावी अछूत कैसे हो गई गंगा माई ?

लेखक : अरुण तिवारी  लोकसभा चुनाव – 2014 में नरेन्द्र भाई मोदी ने गंगा को मां बताया था। आज मां गंगा की कोई चर्चा नहीं है; न मोदी जी के भाषण में, न उमा भारती जी की उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने की उड़ान में। इस बार मोदी जी ने…

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नदी लेख

जन जुङे, तब विनाश रुके

अभी लोग सोचते हैं कि नदियां सरकार की हैं। समस्या का समाधान भी सरकार ही करेगी। यह सोच ही समाधान के मार्ग में सबसे बङी बाधा है। यह सोच बदलनी होगी। सोच बदली तो ये लोग ही सरकारों को बता देंगे कि तात्कालिक योजना बाढ राहत की जरूर हो, लेकिन…

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बाढ़ नहीं, इसकी तीव्रता व टिकाऊपन से डरें

लेखक : अरुण तिवारी बाढ़ के कारणों पर चर्चा के शुरु में ही एक बात साफ कर देनी जरूरी है कि बाढ़ बुरी नहीं होती; बुरी होती है एक सीमा से अधिक उसकी तीव्रता तथा उसका जरूरत से ज्यादा दिनों तक टिक जाना। बाढ़, नुकसान से ज्यादा नफा देती है।   “वे…

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एक चिट्ठी, धर्माचार्यों के नाम

संदर्भ: मूर्ति विसर्जन पर प्रधानमंत्री जी  के मन की बात 01-09-2016 सभी आदरणीय धर्माचार्यों को प्रणाम।  मूर्ति विसर्जन से नदी प्रदूषण के मसले को लेकर ’मन की बात’ कहते हुए प्रधानमंत्री जी ने प्लास्टिक आॅफ पेरिस की बनी मूर्तियों का इस्तेमाल न करने का जो आहवा्न किया है, निश्चित ही वह प्रशंसनीय है,…

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