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प्रकृति लेख

आज का लेख, जलतरंग, नदी लेख, पानी लेख, प्रकृति लेख

न्यू इण्डिया के नारे के बीच पानी, खेती और शहरों की तसवीर तथा बाजार व सरकार के रवैये को सामने रखती एक कविता

यह न्यू इण्डिया है…रचनाकार : अरुण तिवारी 1.  पानी बूंदा है, बरखा है,पर तालाब रीते हैं।माटी के होंठ तक कई जगह सूखे हैं।भूजल की सीढ़ी के नित नये डण्डे टूटे हैं।गहरे-गहरे बोर नेकई कोष लूटे हैं।शौचालय का शोर भी कई कोष लूटेगा।स्वच्छ नदियों का गौरव बचा नहीं शेष अब,हिमनद के आब तकपहुंच गई आग आज,मौसम की चुनौतीघर…

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समाज का प्रकृति एजेण्डा जगाती एक पुस्तक

पुस्तक का नाम: समाज, प्रकृति और विज्ञान लेखक:श्री विजयदत्त श्रीधर, श्री राजेन्द्र हरदेनिया, श्री कृष्ण गोपाल व्यास, डाॅ. कपूरमल जैन, श्री चण्डी प्रसाद भट्टसंपादक: श्री राजेन्द्र हरदेनियाप्रकाशक: माधवराव सप्रे स्मृति समाचारप संग्रहालय, एवम् शोध संस्थान, माधवराव सप्रे मार्ग (मेन रोड नंबर तीन), भोपाल (म.प्र.) – 462003संपर्क :  फोन: 0755-2763406 / 4272590,…

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गंगोत्री के हरे पहरेदारों की पुकार

लेखक: सुरेश भाई एक ओर ‘नमामि गंगे’  के तहत् 30 हजार  हेक्टेयर भूमि पर वनों के रोपण का लक्ष्य है तो दूसरी ओर गंगोत्री से हर्षिल के बीच हजारों हरे देवदार के पेडों की हजामत किए जाने का प्रस्ताव है। यहां जिन देवदार के हरे पेडों को कटान के लिये…

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NAPM निमंत्रण : ‘मुक्त बहने दो’ पुस्तक विमोचन तथा उत्तराखंड में भूमि का सवाल पर चर्चा

जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, उत्तराखंड                     कंडी खाल, पो0 आ0 कैम्पटी वाया मसूरी, टिहरी गढवाल, उत्तराखंड–248179      09718479517, 9927145123 निमंत्रण 10 जून, 2017 शनिवार   समय- 11 बजे से 3.30 तकस्थान- जैन धर्मशाला, निकट प्रिंस चौक, देहरादून, उत्तराखंड  प्रिय साथी , जिंदाबाद!!    बांध परियोजनाओं को उत्तराखंड में विकास के लिये प्रचारित किया गया है। पर्यावरण…

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अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस २०१७ पर विशेष : जन जुड़ेगा तो बचेगा पर्यावरण

श्री अनुपम मिश्र जी और उनसे परिचय करती भेड़ें : यूँ जुड़े प्रकृति का हर अंग तो कुछ बात बने आदरणीय / आदरणीया,नमस्ते . अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस – 2017 का संयुक्त राष्ट्र संघ निदेशित वाक्य है – कनेक्ट विथ नेचर अर्थात प्रकृति से जुड़ें.इसके मायने को खोलता अरुण तिवारी लिखित लेख नवभारत टाइम्स के 05…

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जैविक में है दम, सिक्किम बना प्रथम

लेखक : अरुण तिवारी  यदि हमारी खेती प्रमाणिक तौर पर 100 फीसदी जैविक हो जाये, तो क्या हो ? यह सोचते ही मेरे मन में सबसे पहले जो कोलाज उभरता है, उसमें स्वाद भी है, गंध भी, सुगंघ भी तथा इंसान, जानवर और खुद खेती की बेहतर होती सेहत भी। इस…

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कितना असाधारण अब सौ फीसदी कुदरती हो जाना

लेखक : अरुण तिवारी  प्रकृति का एक नियम है कि हम उसे जो देंगे, वह हमें किसी न किसी रूप में उसे लौटा देगी। जो खायेंगे, पखाने के रूप में वही तो वापस मिट्टी में मिलेगा। सभी जानते हैं कि हमारे उपयोग की वस्तुएं जितनी कुदरती होंगी, हमारा पर्यावरण उतनी ही…

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क्यों है खास चातुर्मास ?

लेखक: अरुण तिवारी चातुर्मास का मतलब है, आषाढ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी तक के चार महीने। इन चार महीनों में मौजूद भारत के पारंपरिक ज्ञानतंत्र की इस खूबी को अत्यंत बारीकी से समझने की जरूरत है कि…

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भारतीय जल दर्शन में मेघ गर्भधारण का विज्ञान

प्रस्तुति : अरुण तिवारी मेघ गर्भ लक्षण वराह मिहिर रचित ‘बृहत संहिता’ में मेघ गर्भ धारण का उल्लेख है; तद्नुसार मेघ गर्भ धारण के समय ग्रहों बिम्बों के आकार बङे, ग्रहों की किरणें कोमल व उत्पात रहित, नक्षत्रों के गमन मार्ग की दिशा उत्तर, पेङ-पौधों में  अंकुरण तथा जीवों में प्रसन्नता का…

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भारतीय दर्शन में प्रकृति और जल

प्रस्तुति  : अरुण तिवारी हम स्वयं और हमारे पास-दूर जिस किसी वस्तु या क्रिया का अस्तित्व है, जो दिखती है और जो नहीं भी दिखती है, वही तो प्रकृति है। आइये, शब्दार्थानुसार प्रकृति को जानें। ‘प्र’ का अर्थ है ‘प्रकृष्ट’ और ‘कृति’ से सृष्टि के अर्थ का बोध होता है।…

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