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प्रकृति लेख

आज का लेख, पानी लेख, प्रकृति लेख

भारतीय जल दर्शन में मेघ गर्भधारण का विज्ञान

प्रस्तुति : अरुण तिवारी मेघ गर्भ लक्षण वराह मिहिर रचित ‘बृहत संहिता’ में मेघ गर्भ धारण का उल्लेख है; तद्नुसार मेघ गर्भ धारण के समय ग्रहों बिम्बों के आकार बङे, ग्रहों की किरणें कोमल व उत्पात रहित, नक्षत्रों के गमन मार्ग की दिशा उत्तर, पेङ-पौधों में  अंकुरण तथा जीवों में प्रसन्नता का…

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a painting showing a tree as human brain
आज का लेख, प्रकृति लेख

भारतीय दर्शन में प्रकृति और जल

प्रस्तुति  : अरुण तिवारी हम स्वयं और हमारे पास-दूर जिस किसी वस्तु या क्रिया का अस्तित्व है, जो दिखती है और जो नहीं भी दिखती है, वही तो प्रकृति है। आइये, शब्दार्थानुसार प्रकृति को जानें। ‘प्र’ का अर्थ है ‘प्रकृष्ट’ और ‘कृति’ से सृष्टि के अर्थ का बोध होता है।…

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आज का लेख, प्रकृति लेख

पर्यावरण कैलेण्डर

ग्लोबल ग्रीन्स का अभिनव प्रयास प्रस्तुति : पानी पोस्ट टीम नमभूमि, जल, जैव विविधता, बाघ, नदी, पृथ्वी, ओजोन, पशु, पर्वत, मछली आदि के नाम पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने ऐसे कई दिवस घोषित किए हैं, जिनका मकसद पर्यावरण के प्रति विश्व में जागृति, संवेदना, सरोकार और संकल्प पैदा करना है।…

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आज का लेख, नदी लेख, पानी लेख, प्रकृति लेख, समय विशेष

धरती बचाओ साइकिल यात्रा

पर्यावरण दिवस पर पहल : अलख जगाने निकला ज्ञान लेखक : अरुण तिवारी तपती धरती, कटते दरख्त, सूखते जलस्त्रोत, बढ़ता दोहन, तङफते लोग, उदासीन समाज व सरकार – वर्तमान का यह परिदृश्य आज अनेक को बेचैन करता है। सब-कुछ जानते-समझते हुए भी कुछ न कर पाने की छटपटाहट भी अनेक मन…

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निर्मल ग्राम बरेवां : खिताब बचाने की जद्दोजहद

लेखक : अरुण तिवारी बीती 26 मई को मोदी शासनकाल ने अपने दो साल पूरे किए। दो साल पूरे करने से पहले स्वच्छता पखवाङा मनाया। गांवों को ’राष्ट्रीय निर्मल गांव पुरस्कार’ बांटने के बाद अब सरकार ने शहरों की स्वच्छता रैंकिंग करने की तैयारी कर ली है। ’स्वच्छ सर्वेक्षण’ का…

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विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष

खाद्य श्रृंखला बचाने से बचेगा वन्य जीवन ————————————————————-                                   लेखक : अरुण तिवारी वायुमंडल, जलमंडल और अश्ममंडल – इन तीन के बिना किसी भी ग्रह पर जीवन संभव नहीं होता। ये तीनो मंडल जहां…

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प्रकृति के प्रति बिकाऊ संवेदनायें

————————————————————————————————————————– यह तो भारतीय संस्कृति नहीं है लेखिका : शालिनी तिवारीshalinitiwari1128@gmail.com प्रकृति यानी एक ऐसी कृति जो पहले से ही अस्तित्व में है । कभी लोप न होने वाले इस अस्तित्व के कारण ही सभी जड़-चेतन एक सामंजस्य के साथ गतिमान है; यहां तक कि समूचे ब्रह्माण्ड की गतिशीलता का मूल भी…

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चलो, लौटा लायें मंथन वाला कुंभ

लेखक: अरुण तिवारी पौराणिक संदर्भ प्रमाण हैं कि कभी नदियों की समृद्धि के काम में राजा-प्रजा-ऋषि… तीनों ही साझीदार हुआ करते थे। तीनों मिलकर नदी समृद्धि हेतु चिंतन करते थे। यही परिपाटी लंबे समय तक कुंभ की परिपाटी बनी रही। कुंभ सिर्फ स्नान का पर्व कभी नहीं रहा। अनुभव बताता…

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पृथ्वी दिवस पर विशेष – तीन

कैसे मनायें पृथ्वी दिवस ? लेखक : अरुण तिवारी  पृथ्वी दिवस – हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 22 अप्रैल को आ ही गया अंतर्राष्ट्रीय मां पृथ्वी का यह दिन। सोचना यह है कि हम इसे कैसे मनायें ? सीधे कहूं तो पृथ्वी दिवस पर दुनियाभर में गोष्ठी, सेमिनार,…

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पृथ्वी दिवस पर विशेष – दो

भारतीय, इसलिए भी मनायें पृथ्वी दिवस लेखक : अरुण तिवारी यूं तो मैं सीधे-सीधे कह सकता हूं कि 22 अप्रैल-पृथ्वी दिवस, सिर्फ संयुक्त राष्ट्र संघ अथवा संयुक्त राज्य अमेरिका से जुङे संगठनों व देशों को पृथ्वी के प्रति दायित्व निर्वाह की याद दिलाने का मौका नहीं है; यह प्रत्येक जीव…

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