उमा जी सामने होती, तो गर्दन पकङ लेता : स्वामी सानंद

प्रस्तोता: अरुण तिवारी (यह प्रस्तुति, इसी जुलाई के दूसरे सप्ताह में स्वामी सानंद से हुई बातचीत के अंशों पर...

क्यों है खास चातुर्मास ?

लेखक: अरुण तिवारी चातुर्मास का मतलब है, आषाढ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक मास...

मेरा देहदान हो, श्राद्ध नहीं : स्वामी सानंद

प्रस्तुति: अरुण तिवारी प्रो जी डी अग्रवाल जी से स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी का नामकरण हासिल गंगापुत्र की एक...

अविवाहित सानंद की पारिवारिक दृष्टि

प्रस्तुति: अरुण तिवारी  प्रो जी डी अग्रवाल जी से स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी का नामकरण हासिल गंगापुत्र की एक...

साधुओं ने गंगाजी के लिए क्या किया ? : स्वामी सानंद

प्रस्तुति: अरुण तिवारी  प्रो जी डी अग्रवाल जी से स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी का नामकरण हासिल गंगापुत्र की एक...
आज का लेख, नदी लेख, संवाद
उमा जी सामने होती, तो गर्दन पकङ लेता : स्वामी सानंद
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क्यों है खास चातुर्मास ?
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मेरा देहदान हो, श्राद्ध नहीं : स्वामी सानंद
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अविवाहित सानंद की पारिवारिक दृष्टि
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साधुओं ने गंगाजी के लिए क्या किया ? : स्वामी सानंद
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अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस २०१७ पर विशेष : जन जुड़ेगा तो बचेगा पर्यावरण

श्री अनुपम मिश्र जी और उनसे परिचय करती भेड़ें : यूँ जुड़े प्रकृति का हर अंग तो कुछ बात बने आदरणीय / आदरणीया,नमस्ते . अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस – 2017 का संयुक्त राष्ट्र संघ निदेशित वाक्य है – कनेक्ट विथ नेचर अर्थात प्रकृति से जुड़ें.इसके मायने को खोलता अरुण तिवारी लिखित लेख नवभारत टाइम्स के 05…

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arun tiwari and river ganga
आज का लेख, जलतरंग, नदी लेख, समय विशेष

गंगा तट से बोल रहा हूं : अरुण तिवारीFeatured

हंसा तो तैयार अकेला , तय अब हम को ही करना है  स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (प्रो जी डी अग्रवाल जी ) के गंगा अनशन (वर्ष 2013) पर छाई चुप्पी से व्यथित होकर अनशन के 100वें दिन श्री अरुण तिवारी ने एक अत्यंत मार्मिक आहृान किया था। मातृ सदन के स्वामी…

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आज का लेख, प्रकृति लेख

जैविक में है दम, सिक्किम बना प्रथम

लेखक : अरुण तिवारी  यदि हमारी खेती प्रमाणिक तौर पर 100 फीसदी जैविक हो जाये, तो क्या हो ? यह सोचते ही मेरे मन में सबसे पहले जो कोलाज उभरता है, उसमें स्वाद भी है, गंध भी, सुगंघ भी तथा इंसान, जानवर और खुद खेती की बेहतर होती सेहत भी। इस…

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आज का लेख, प्रकृति लेख

कितना असाधारण अब सौ फीसदी कुदरती हो जाना

लेखक : अरुण तिवारी  प्रकृति का एक नियम है कि हम उसे जो देंगे, वह हमें किसी न किसी रूप में उसे लौटा देगी। जो खायेंगे, पखाने के रूप में वही तो वापस मिट्टी में मिलेगा। सभी जानते हैं कि हमारे उपयोग की वस्तुएं जितनी कुदरती होंगी, हमारा पर्यावरण उतनी ही…

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आज का लेख, समय विशेष

चुनाव सुधार के चार कदम

लेखक : अरुण तिवारी जनगणना-2011 के अनुसार, कुल भारतीय ग्रामीण आबादी में से 74.5 प्रतिशत परिवारों की आय पांच हजार रुपये प्रति माह से कम है। इसके विपरीत भारत की वर्तमान केन्द्रीय मंत्रिपरिषद के 78 मंत्रियों में से 76 करोड़पति हैं। राज्य विधानसभाओं के 609 मंत्रियों में से 462 करोड़पति…

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आज का लेख, नदी लेख

यकायक इतनी चुनावी अछूत कैसे हो गई गंगा माई ?

लेखक : अरुण तिवारी  लोकसभा चुनाव – 2014 में नरेन्द्र भाई मोदी ने गंगा को मां बताया था। आज मां गंगा की कोई चर्चा नहीं है; न मोदी जी के भाषण में, न उमा भारती जी की उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने की उड़ान में। इस बार मोदी जी ने…

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अरुण के आंचल में खुशबू खज़ाना

लेखक  : अरुण तिवारी उगते सूरज का प्रदेश, सर्वाधिक क्षेत्रीय बोलियों वाला प्रदेश, भारत के तीसरा विशाल राष्ट्रीय पार्क (नाम्दाफा नेशनल पार्क ) वाला प्रदेश जैसे भारतीय स्तर के कई विशेषण अरुणाचल प्रदेश के साथ जुडे़ हैं, लेकिन अरुणाचल प्रदेश के लिए जो विशेषण सबसे खास और अनोखा है, वह है, यहां…

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आज का लेख, पानी लेख

हम हवा-पानी सोखन लगे, तो को कर सकै उद्धार

हर्ष की बात है कि विश्व नमभूमि दिवस – 2017 से ठीक दो दिन पहले ऑस्ट्रेलिया सरकार ने 15 लाख डाॅलर की धनराशि वाले ’वाटर एंबडेंस प्राइज’ हेतु समझौता किया है। यह समझौता, भारत के टाटा औद्योगिक घराने और अमेरिका के एक्सप्राइज़ घराने के साथ मिलकर किया गया है।    विषाद का विषय है कि…

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आज का लेख, समय विशेष, संवाद

तालाब जितने सुंदर व श्रेष्ठ होंगे, अनुपम की आत्मा उतना सुख पायेगी – राजेन्द्र सिंह

अनुपम स्मृति प्रस्तुति: अरुण तिवारी हम सभी के अपने श्री अनुपम मिश्र नहीं रहे। इस समाचार ने खासकर पानी-पर्यावरण जगत से जुडे़ लोगों को विशेष तौर पर आहत किया। अनुपम जी ने जीवन भर क्या किया; इसका एक अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अनुपम जी के प्रति…

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नदी लेख

जन जुङे, तब विनाश रुके

अभी लोग सोचते हैं कि नदियां सरकार की हैं। समस्या का समाधान भी सरकार ही करेगी। यह सोच ही समाधान के मार्ग में सबसे बङी बाधा है। यह सोच बदलनी होगी। सोच बदली तो ये लोग ही सरकारों को बता देंगे कि तात्कालिक योजना बाढ राहत की जरूर हो, लेकिन…

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भारतीय दर्शन में प्रकृति और जल

प्रस्तुति  : अरुण तिवारी हम स्वयं और हमारे पास-दूर जिस किसी वस्तु या क्रिया का अस्तित्व है, जो दिखती है और जो नहीं भी दिखती है, वही तो प्रकृति...

स्वामी सानंद: परिवार और यूनिवर्सिटी ने मिल गढ़ा गंगा व्यक्तित्व

12.06.2016 आदरणीय / आदरणीया पाठकगण  हमसे बड़ी भूल हुई है .  हम क्षमा चाहते हैं  कि स्वामी सानन्द गंगा संकल्प श्रृंखला के कथन प्रस्तुत करते हुए भूलवश कथन  संख्या 15,...