आज का लेख, समय विशेष

द्वितीय अनुपम स्मृति (19 दिसम्बर, 2018) : एक रिपोर्ट

नदी, पानी और जीवन के नैतिकता पहलुओं पर छाई वर्तमान छंई को देखते हुए कह सकते हैं कि धुआ मिश्रित इस धुंध के बीच यदि सवेरा लाना है तो हमें अनुपम साहित्य और उनके जीवन के कथा-चित्रों को खंगालना ही पडे़गा।

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