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कुदरत ने वायुमंडल में मुख्य रूप से आॅक्सीजन और नाइटोजन का मुख्य घटक बनाया। सूरज की पराबैंगनी किरणों को रोकने के लिए 10 से 15 किलोमीटर की उंचाई पर आजोन गैस की सुरक्षा परत बनाई। हमने क्या किया ? हमने ओजोन की चादर को पहले कंबल, फिर रजाई और अब हीटर बना दिया। वायुमंडल मेंकार्बनडाइआॅक्साइड की मात्रा इसलिए बनाई, ताकि धरती से लौटने वाली गर्मी को बांधकर तापमान का संतुलन बना रहे। इसकी सीमा बनाने के लिए उसने कार्बन डाई आॅक्साइड के लिए सीमित स्थान बनाया। हमने यह स्थान घेरने की अपनी रफ्तार को बढ़ाकर 50 अरब मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक तेज कर लिया। जानकारों के मुताबिक, वायुमंडल में मात्र एक हजार अरब टन कार्बन डाई आॅक्साइड का स्थान बचा है; यानी अगले 20 वर्ष बाद वायुमंडल में कार्बन डाई आॅक्साइड के लिए कोई स्थान नहीं बचेगा। नतीजे में कहा जा रहा है कि वर्ष 2100 तक दुनिया 2.7 डिग्री तक गर्म होने के रास्ते पर है। वल्र्ड वाच इंस्टीट्युट की रपट भिन्न है। वह अगले सौ वर्षों में हमारे वायुमंडल का तापमान पांच डिग्री सेल्सियस तक अधिक हो जाने का आकलन प्रस्तुत कर रहा है। ये आंकङे कितने विश्वसनीय हैं कहना मुश्किल है। हां, यह सच है कि इस तापमान वृद्धि से मिट्टी का तापमान, नमी, हवा का तापमान, दिशा, तीव्रता, उमस, दिन-रात तथा मौसम से मौसम के बीच में तापमान सीधे प्रभाव में हैं। क्या होगा ? 
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 संकलन: पानी पोस्ट टीम