लेखक: अरुण तिवारी

भारत के पानी के प्रति दुनिया के कर्जदाता देशों के नजरिये और नतीजे बता रहे हैं कि भारत का पानी उनके बिजनेस खेल का शिकार बन चुका है। इस परिदृश्य की सहज प्रस्तुति की दृष्टि से सीधे संवाद शैली में लिखा एक व्यंग्य लेख : 


डियर इंडि ! मैं, दुनिया के रेगुलेटर्स के प्रतिनिधि के तौर आपसे बात कर रहा हूं; आफ्टर आल वी गर्वन द वल्र्ड। जस्ट रिमेम्बर, डे के रूप में हमने आपको वाटर, एनवायरन्मेंट, फाॅरेस्ट, मदर्स, वेलेन्टाइन डे… बहुत कुछ दिया है। अगस्त आ गया है। 15 अगस्त-इंडियन इंडिपेन्डेन्स  डे भी हमारी ही मेम्बर कन्ट्री ने ही आपको दिया है। अब आपको भी हमे कुछ देना चाहिए। है कि नहीं ? 
इधर मैने वल्र्ड वाटर लीग-2020 प्लान की है। अब भारत कोई विश्व को दिवस देने वाली कंट्री तो है नहीं कि मै, वल्र्ड वाटर लीग की शर्तें लिखनेे से पहले आपके साथ बात करुं; राय करुं। लेकिन तुम्हारे साथ मैं खेल तो सकता ही हूं। आओ इंडि ! दिवस-देवस खेलते हैं। देवस समझती हो न ? जो देकर वश में कर ले। मैं तुम्हे दिवस दूंगा, तुम मुझे नदियां देना। कितना मजा आयेगा! जब मैं समंदर बन जाउंगा, तुम मछली बन जाना; तब तुम मुझसे पानी मांगना। मैं तुमसे पुछूंगा- कित्ता पानी ? मंजूर ?… मंजूर। तो खेल शुरु !! हरा समंदर गोपी चंदर ,बोल मेरी मछली कित्ता पानी ?…….
चलिए! मैं तुम्हे कर्ज देता हूं; तुम मुझे सूद दो, मूल दो.. परियोजना दो। मैं तुम्हे वेंडर देता हूं; तुम मुझे टेंडर दो; ग्लोबल टेंडर! मैं तुम्हे सलाह देता हूुं; तुम मुझे फीस दो। मैं तुम्हे पावर दूंगा; तुम मुझे मैनपावर दे देना। मैं तुम्हे माइग्रेशन दूंगा; तुम मुझे इमिग्रेशन दे देना। तुम इन्वेस्टमेंट.. इन्वेस्टमेंट चिल्लाना। मैं डस्ट इंन्डस्ट्री लगाकर मैं तुम्हारी नदियों को डस्ट देता रहूंगा; तुम उन्हे डस्टबिन बना देना। मैं तुम्हारे लिए कुछ भी करुंगा; तुम्हे क्रेन भी दूुंगा, माइग्रेन भी दूंगा। मैं तुम्हारे लिए इधर-उधर से मशीने जोङूंगा; तुम मेरे लिए नदिया जोङ देना। मैं सेफ वाटर..सेफ वाटर की डुगडुगी बजाऊंगा; तुम पानी खराब.. पानी खराब का शोर मचाती रहना। 
फिर ?
फिर क्या ? पानी खराब है या नहीं, यह जांचने का किसके पास वक्त है! बिजनेस चल निकलेगा; मेरा भी, तुम्हारा भी। सब कहेंगे – ’’रियली कन्सन्र्ड गवर्नमेंट’’। फिर मैं तुम्हे ’आर ओ’ देता रहूंगा; तुम मुझे अपने सब मिनरल दे देना। मैं तुम्हे लेटेस्ट वाटर डेबिट देता रहूंगा; तुम मुझे सेफ, सेनेटाइज्ड और हैल्दी इंडिया का क्र्रेडिट देना। मैं तुम्हे बोतल में बंद पानी देता रहूंगा; तुम मुझे बाजार देती रहना। मैं तुम्हारा वाटर सप्लाई सिस्टम संभाल लूंगा; तुम मेरा डिजीटल वाटर मीटर संभाल लेना। फिर मैं पूछता रहूंगा; तुम बताती रहना -बोल मेरी मछली कित्ता पानी….? 
वाह इंडि! तुम कितनी अच्छी हो! मैनें तुम्हे बोतलबंद पानी क्या दिया; तुम तो बिलकुल हमारी जैसी ही होती जा रही हो! अपनी सुराही ही भूल गई। मैने कचरा रेल से लेकर सुपरफास्ट रेल की जनरल बोगी तक में देख लिया है। खुले पानी में तैरना तो दूर, तुम तो खुला पानी पीने से ही परहेज करने लगीे हो। …पर यह क्या किया ? हमसे पहले ही तुमने नदियों को कचरा ढोने वाली रेल बना दिया। यह तो हमारे द्वारा किया जाना तय था। जो हमारी इंडस्टीªज को करना था; वह तुम्हारे मल व इंडस्ट्रीज ने कर दिखाया। यार इंडी! ’कचरा पाॅलिटिक्स’ में तो तुम हमसे भी आगे निकल गई। अब हम अपना कचरा कहां डाले ? चलो, रिवर रिजुनेशन के नाम पर सिल्ट निकालो, नई नदियां बनाओ; हम उन्हे नाला बनायेंगे। गर नई नदी नहीं बना सकते, तो एक नदी बहाकर दूसरी नदी तक ले जाओ। नदियों में ज्यादा पानी के फर्जी आंकङे दिखाओ। रिवर बेल्ट में इंडस्ट्रियल काॅरीडोर बनाओ; टाउन बसाओ। बाढ. रोकने के नाम पर एक्सप्रेस वे बनाओ। अखबारों में उनकी तारीफ में रिपोर्ट छपाओ…. और फिर नदियों में कचरा जाने लगे, तो राज्य बनाम केंद्र का रवैया अपनाओ। गंगा मास्टर प्लान-2020 बनाओ। खेल के नियम इतनी जल्दी भूल न जाओ। समझ गई न ?  
लेकिन इंडि ! मैने यह थोङे ही कहा था कि मैं अपनी मशीने दूं, तो तुम अपना कुदाल-फावङा भूल जाना। मेरे वर्जन के चक्कर में अपना जलदर्शन भूल जाना। मनरेगा मे तालाब के नाम पर बंद चारदीवारी बनाना। मैने कब कहा था कि गर्मी-गर्मी जंगल में आग लगाना। हर महीने पोलियो रविवार मनाना। आयोडीन के आगे देसी नमक भूल जाना। हां, अपेक्षा जरूर की थी। लेकिन तुम तो हमारी तरह वेलेन्टाइन डे भी मनाने लगी हो, सोशल साइट्स भी चलाने लगी हो। नेट से लेकर मेट, डेट, चैट तक सब आजमाने लगी हो। अपने को आई टी की रानी बताने लगी हो। लगता है कि अब तो तुम्हे भी शौक हो गया है हमारे जैसी बनने का। तुम भी क्या खूब हो! हमने वल्र्ड वाटर लीग-2020 का फाइनल शो इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक के अंत तक करना तय किया था। तुम तो बहुत फास्ट निकली। वर्ष 2015 से पहले ही फाइनल में जा पहुंची। ठीक है, ठीक है,.. लगी रहो। हम तुम्हारा योगा अपना रहे है, नीम-हल्दी का पेटेन्ट करा रहे हैं; तुम हमारा टेंशन अपनाओ। हो सके, तो पानी भी आॅनलाइन पिलाओ। जितना रिस्क, उतना फायदा। जी डी की चिंता छोङो; जी डी पी बढाओ। अभी तुम डेवल्प कर रही हो। एक दिन डेवल्पड हो ही जाओगी। यूनाइटेड नेशन्स आॅर्गेनाइजेशन की मेंबर बनकर शान से परचम लहराओगी। यही होगा हमारे खेल का अंतिम परिणाम। कांगे्रचुलेशन्स !! मैनी.. मैनी रिटर्न आॅफ द डिपेन्डेन्स डे। मीट यू नेकस्ट टाइम !!
दोस्तो, यह है इंडिया के साथ वल्र्ड का असल वाटर लीग-इंडिया 2020.

लक्ष्य बिल्कुल साफ है – मेरा वेेस्ट (कचरा) ले, इंडिया का बेस्ट (सर्वश्रेष्ठ) दे। 

इस खेल के नियम भारत की केंद्र-राज्य सरकारों तथा कारपोरेट वल्र्ड के पुरोधाओं की सहमति से तैयार किए गये हैं। कई एन जी ओ ने भी इसे आगे बढाने का जिम्मा ले लिया है।  

गरीबी रेखा से ऊपर रहने वालों तो अभी बंद पानी की दो बोतलें और दो रुपये के स्मार्ट पैक बिस्क्टि रोज खरीद ही सकते हैं। 

अब गरीबी रेखा से नीचे वालों को तय करना है कि वे खेल में दर्शक की भूमिका निभायें या बीच स्टेडियम में ढाल देखकर आने वाली देवउठनी ग्यास को कुदाल-फावङे-दरख्त उठायें; अपना पानी बचायें।
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