जब सैंया भये कोतवाल, तो डर काहे का


उम्मीद थी कि लोगों को जीवन जीने की कला सिखाने वाला ’आर्ट आॅफ लिविंग’, यमुना के जीवन जीने की कला में खलल डालने से बचेगा; साथ ही वह भी यह भी नहीं चाहेगा कि उनके आयोजन में आकर कोई यमुना प्रेमी खलल डाले। किंतु इस लेख के लिखे जाने तक जो क्रिया और प्रतिक्रिया हुई, उससे इस उम्मीद को झटका लगा है।
हरित पंचाट पहुंची यमुना
गौरतलब है कि आर्ट आॅफ लिविंग की 35 वीं सालगिरह मनाने के लिए, मयूर विहार फेज-एक (दिल्ली) मेट्रो स्टेशन और डीएनडी फलाईओवर के बीच के यमुना खादर में आयोजन को मंजूरी दिए जाने के विरोध में ’यमुना जिये अभियान’ संयोजक श्री मनोज मिश्र ने राष्ट्रीय हरित पंचाट में अपनी याचिका दायर कर दी है। याचिका में कहा गया है कि प्रतिबंध के बावजूद यमुना खादर की करीब 25 हेक्टेयर पर मलबा डंप किया जा रहा है। उन्होने इसे यमुना के पर्यावास के लिए घातक बताया है। गौरतलब है कि पंचाट के ही एक पूर्व आदेशानुसार, ऐसा करने पर 50 हजार रुपये जुर्माना किया जाना चाहिए। पंचाट ने याचिका स्वीकार करते हुए आर्ट आॅफ लिविंग फाउंडेशन तथा दिल्ली विकास प्राधिकरण..दोनो को नोटिस थमा दिया है। न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने आई आई टी, दिल्ली के प्रो. ए. के गोसांई को आदेश दिए हैं कि वह डी डी ए के वकील के साथ जाकर मौके का मुआइना करें और एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट दें। अगली सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तारीख तय कर दी गई है।
प्रतिक्रिया: खूंटा यहीं गङेगा
इस बीच मलबा डालने की तसवीरें जारी करने के बावजूद श्री श्री ने दैनिक भास्कर के प्रतिनिधि श्री अनिरुद्ध शर्मा को दिए अपने साक्षात्कार में  मलबा डालने की खबर को गलत करार दिया है। आयोजन से यमुना क्षति का पाश्चाताप् करने की बजाय, उलटे उन्होने दावा किया है कि उनके आयोजन से यमुना को नुकसान की बजाय, फायदा होगा। आयोजन में आ रहे लोग, एक ऐसा एंजाइम लेकर आयेंगे, जिससे दिल्ली की यमुना में गिरने वाले 17 नालों में बहाया जायेगा। दिलचस्प है कि उन्होने यह भी कहा कि यमुना की ज़मीन का चुनाव इसलिए भी किया गया है, ताकि लोगों का ध्यान यमुना की ओर आकर्षित हो। 
रिकार्ड बनाने की तैयारी 
यमुना जी को लेकर ’आर्ट आॅफ लिविंग’ की यह नजर और नजरिये को जीवन जीने की किस कला श्रेणी में रखें; पाठक बेहतर तय कर सकते हैं। आर्ट आॅफ लिविंग की तरफ से तय है कि इसमें भारत के महामहिम राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी और माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी से लेकर देश-विदेश की बङी हस्तियां भी शामिल होंगी। 11 से 13 मार्च के बीच इसे विश्व सांस्कृतिक महोत्सव की तरह मनाये जाने की योजना है। 35 हजार कलाकार, 40 से ज्यादा वाद्य यंत्रों के लिए एक ऐसा विशाल मंच बनाया जाना है कि उसका नाम गिनीज बुक आॅफ रिकार्डस् में शामिल हो जाये। अपेक्षित 35 लाख आगुन्तकों के लिए शेष व्यवस्था को लेकर करीब एक हजार एकङ ज़मीन पर तैयारियां जोरो पर हैं।
इस परिदृश्य के मद्देनजर मैं तो सिर्फ यहां यह लिखना चाहूंगा कि ठीक ही है कि जब सत्ता साथ हो, तो कोई क्यो परवाह करें ? जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का। शायद यही है इस 21वीं सदी के दूसरे दशक में जीवन जीने की असली कला। 

ज़मीन यमुना की है; इसलिए शायद हमे दर्द नहीं होता। हम यमुना को मां कहते जरूर हैं, किंतु मां के दर्द से दुखी नहीं होते। ऐसे ही हैं हम दिल्ली वाले…संवेदनाशून्य !

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फोटो साभार : wikipedia.org ; tehelka.com
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