मेरी टिप्पणी मुख्य रूप से अंग्रेजी ड्राफ्ट को लेकर है  :


1.      हिंदी और अंग्रेजी दोनों में एक्ट के शीर्षक को लेकर भिन्नता है. अंग्रेजी में इसे River Conservation Act 2015  कहा जा रहा है | हिंदी में इसे जल सुरक्षा अधिकार विधेयक  कहा गया है. इसे एक ही कहना होगा |

2.      वैसे अंग्रेजी और हिंदी के अनुवाद में लगभग एकरूपता है कहीं-कहीं हिंदी में कुछ छूट गया है | उसे ठीक कर लिया जाय |

3.      अंग्रेजी ड्राफ्ट में पेज न. 1 Local Bodies शब्द का जहाँ प्रयोग हुआ है, वहाँ Self Government and Other Local Legal Bodies  शब्द का प्रयोग होना चाहिए, क्योंकि पंचायत और नगरपालिका यही दो संवैधानिक संस्थाएं है और इन्हें संविधान ने Self Government कहा गया है | इनके लिए कहीं भी Local Bodies शब्द का प्रयोग नहीं है | अन्य जिन स्थानीय संस्थाओं की बात
की गई है वे सब किसी कानून द्वारा बनाई गई Bodies है वे संविधान का हिस्सा नहीं है | अत: उन्हें local Bodies कहना उपयुक्त होगा |

4.      अंग्रेजी ड्राफ्ट के पेज न. 3 पर क्रमांक 15 में Local Authority की परिभाषा में जहाँ पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम का उल्लेख है, उसके आगे कोष्ठक में Self Government अवश्य लिखा जाय | अन्य को Local Legal Bodies कहा जाय |

5.      पेज न. 3 के क्रमांक 27 में State Government की परिभाषा में संविधान के जिस अनुच्छेद 239 में उल्लेख किया गया है, वह केन्द्रशासित राज्यों के सन्दर्भ में है वह सामान्य क्षेत्र के राज्य के सन्दर्भ में नहीं है | अतः यह उल्लेख गलत है | 

‘राज्य सरकार’ को परिभाषित करने वाला कोई अनुच्छेद संविधान में नहीं है | संविधान के भाग़ 6 में अनुच्छेद 152 से 237 तक राज्यों की राज्य व्यवस्था का पूरा प्रावधान किया गया है | ‘राज्य सरकार’ जैसा अलग से कुछ नहीं है | ‘राज्य सरकार’ को अपने तरीके से ही
परिभाषित करना होगा | किसी अनुच्छेद का उल्लेख गलत होगा |

6.      अंग्रेजी ड्राफ्ट के पृष्ठ 5 पर चेप्टर II धारा 3 में जहाँ Every Local Authority Shall लिखा गया है वहाँ फिर से Local Authority (Self Government and Local Legal Bodies)shall जैसा प्रयोग किया जाना चाहिए |

7.      ड्राफ्ट के पेज 7 के चेप्टर IV में धारा 22 तथा 22 (VIII) में पुनः Local Authority तथा Local Body का प्रयोग भ्रमित कर रहा है | इसे सही करने तथा पूर्व के अनुसार प्रस्तुत करने की आवश्यकता है |

यहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात यह कहनी है कि नदी और जल के संरक्षण तथा प्रबंधन के सन्दर्भ में भारतीय संविधान में पहले से जो प्रावधान है, उसे दृष्टि में रखते हुए इस प्रस्तावित Act को प्रस्तुत करने की आवश्यकता है | इस सन्दर्भ में जानकारी के  लिए संविधान के उन  महत्वपूर्ण प्रावधानों को नीचे दिया जा रहा है  :

  1. संविधान में सातवीं अनुसूची के अंतर्गत संघ तथा राज्य के बीच कार्य बिषय का विभाजन है . इसमें संघ सूची  के अंतर्गत क्रमांक 56 में अंतरराज्यिक नदियों तथा नदी दूनों के विनियमन ओंर विकास का दायित्व भारत सरकार के पास है. 
राज्य सूची में  क्रमांक 17 में -जल, अर्थात जल प्रदाय, सिंचाई और नहरें, जल निकास और तटबंध, जल भण्डारकरण और जलशक्ति का दायित्व राज्य सरकारों के पास है. यहाँ ये उल्लेख करना महत्वपूर्ण होगा कि समवर्ती सूची में नदी ओंर जल जैसा कोई बिषय शामिल नहीं है.

 2.संविधान में ग्यारहवीं अनुसूची  जो 73वें संविधान संशोधन के अंतर्गत पंचायतों के लिए  जोड़ी गई है  उसमे  क्रमांक 3 व 11 में कमशः  लघु सिंचाई, जल प्रबंधन और जल विभाजक क्षेत्र का विकास(3) तथा पेयजल (11) शामिल है.

 3.संविधान में बारहवीं  अनुसूची  जो 74वें संविधान संशोधन के अंतर्गत नगरपालिकाओं के लिए  जोड़ी गई है  उसमे  क्रमांक 5 में – घरेलु, औद्योगिक, और वाणिज्य प्रयोजनों के लिए जल प्रदाय  जैसा बिषय शामिल है. इस प्रकार पंचायत ओंर नगरपालिका जिसे संविधान ने Self Government अर्थात  अपनी सरकार का दर्जा दिया है  उन्हें संवैधानिक रूप में जल तथा जलस्रोतों की जिम्मेवारी सोंपी है . चूँकि संविधान के अनुसार इस जिम्मेदारी को देने का दायित्व राज्यों के विधान मंडलों का है अतः अभी अधिकांश राज्यों में इस जिम्मेवारी  को पूरी तरह से  सोंपा नहीं गया है . लेकिन जिन राज्यों में थोड़ी बहुत जिम्मेवारी सौपी गई है, उनमे उत्तरप्रदेश एक है.

उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम में इसे निम्न प्रकार से उल्लेख किया गया है :

 (तीन) लघु सिंचाई, जल व्यवस्था और आच्छादन विकास :

(क)    लघु सिंचाई परियोजना से जल वितरण में प्रबंध और सहायता करना |
(ख)    लघु सिंचाई परियोजना का निर्माण, मरम्मत और अनुरक्षण, सिंचाई के उद्देश्य से जलापूर्ति का विनियमन |

(ग्यारह ) पेय जल : पीने, कपडा धोने, स्नान करने के प्रयोजनों के लिए जल सम्भरण के लिए सार्वजनिक कुओं, तालाबों और पोखरों का निर्माण, मरम्मत और अनुरक्षण और पिने के प्रयोजनों के लिए जल सम्भरण के स्रोतों का विनियमन |


अधिनियम के इस प्रावधान के सन्दर्भ में जो नियमावली बनाई गई है  उसमे इसके कार्य बिंदु का विस्तार से उल्लेख किया गया है .उत्तर प्रदेश पंचायती राज नियमावली 1947 की धारा  147. में जल-आपूर्ति की शक्ति – जब कभी ग्राम पंचायत अपने क्षेत्र के जल-आपूर्ति के नियंत्रण तथा प्रशासन के लिए उत्तरदायित्व ग्रहण करती है, तब वह निम्नलिखित शक्तियों में से किसी का प्रयोग कर सकेगी :

ग्राम पंचायत 
(क)     क्रय, दान द्वारा या अन्यथा किसी झरना, तालाब, कुआँ, जलसरणी या जल-मार्ग को अर्जित कर सकेगी और उससे जल अभिप्राप्त करने के लिए सुविधा प्रदान कर सकेगी ;
(ख)     सार्वजनिक झरनों, तालाबों तथा कुओं का सन्निर्माण कर सकेगी और समुचित अंतराल पर उनके तथा जल-सरणियों और जलमार्गो की सफाई के लिए व्यवस्था कर सकेगी ;

इसी प्रकार नियमावली की  अनुसूची IV (चार) खण्ड II में पंचायत को उपविधि बनाने का अधिकार भी मिला है .जैसे किसी नाली या परिसर से सार्वजनिक सड़क पर या नदी, पोखरा, तालाब, कुआँ या किसी अन्य स्थान में जल-निस्सरण को प्रतिषिध या विनियमित करने वाली आदर्श उपविधियां 

[धारा 112 (1) (ख)के अंतर्गत कुल 12 उपविधियां है जिसमें कुआँ, तालाब, पोखरा एवं अन्य सभी जल स्रोतों के पानी के संरक्षण, रखरखाव, शुद्धता आदि पर विस्तृत नियम बनाये गए है |

इसी प्रकार धारा 193 में ब्लाक पंचायत एवं जिला पंचायतों को भी जल सम्भरण स्रोतों की रक्षा शीर्षक से दायित्व व अधिकार सौपे गए है | अन्य राज्यों में भी इस तरह के प्रावधान पंचायती राज एक्ट में किये गए हैं .इस बिल को बनाते समय इन प्रावधानों को ध्यान में रखना होगा, क्योंकि इस बिल में भी पंचायत व नगरपलिकयों को ही केन्द्र में रखा गया है.
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सुझावदाता 


डॉ. चंद्रशेखर प्राण
संस्थापक –  तीसरी सरकार अभियान 
8400702128, 9911529966
[email protected] / [email protected]