130 संगठनों की जल संचयन संकल्प सत्याग्रह अपील जब टीकमगढ़ पहुंची, तो उत्तर में एक आवाज़ आई – ”पानी बचाओ, जगत बचाओ।” इस आवाज़ के साथ ही सामने आई संकट में साझे की ताकत, जुटते हाथ, खनकती कुदाल और जुङता बांध; ताकि इस बार बारिश आये, तो नदी सांदनी प्यासी न रहे।

राज्य – मध्य प्रदेश, जिला – टीकमगढ़, विकासखण्ड पलेरा, पंचायत – छरी और टोरी; इन दोनो पंचायतों के लोग यह बात बहुत पहले से जानते थे कि सांदनी की प्यास मिटेगी, तो गांव भी प्यासा नहीं रहेगा। किंतु जलपुरुष राजेन्द्र सिंह और एकता परिषद के संस्थापक श्री पी. व्ही. राजगोपाल की अगुवई में जारी अपील ने इसमें नया चेत दिया – ”सरकार जब आयेगी, तब आयेगी। पानी भगवान जी का है। जरूरत हमारी है। पसीना हमारा बहेगा, तो पानी भी हमें ही मिलेगा।”

जल, जंगल और ज़मीन पर सामुदायिक अधिकार के लिए आंदोलन करने वाले एकता परिषद ने इस बार अधिकार नहीं, कर्तव्य का संदेश दिया। एकता परिषद के राष्ट्रीय समन्वयक अनीश कुमार, एकता परिषद, मुंबई के वरिष्ठ कार्यकर्ता यतीश मेहता, बुंदेलखण्ड-बघेलखण्ड के संतोष सिंह और टीकमगढ़ की अनुभा बहन खुद मौके पर पेश हुए।

यतीश मेहता ने महाराष्ट्र के अनुभव से चेताया, तो संतोष सिंह ने बुंदेलखण्ड में पानी के कारण पलायन की तसवीर सामने रख संदेश दिया कि अब कोई विकल्प शेष नहीं है।

वर्षा जल संचयन सत्याग्रह का संकल्प ही एकमेव विकल्प है। 

बहन ने नारा गुंजाया, तो क्या पलेरा, क्या बसटगुवा, टोरी, रतनगुवा और लिद्वारा…. सभी ने संकट में साझे का संकल्प लिया; तय हुआ कि सांदनी पर 150 फीट लंबा, 15 फीट चैङा और पांच फीट ऊंचा स्टाॅप डैम बनाया जाये।

तय कर लिया, तो फिर रुकना क्यों ?

जो जवाबदेही निभायेगा, हकदारी भी वही पायेगा। 

सनद रहे कि करीब 150 ग्रामीणों ने जवाबदारी से हकदारी के अभियान की शुरुआत कर दी है। संलग्न तसवीरें देखकर आप खुद अंदाज लगाइये कि आगाज कैसा है और बारिश के बाद पलेरा में सांदनी का अंदाज कैसा होगा – पानी पोस्ट टीम









      



सभी फोटो व जानकारी स्त्रोत: अनीश, राष्ट्रीय समन्वयक, एकता परिषद, भोपाल
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