…………………………………………………….फोटो साभार : indialocation.in………………………………………………



जल ही जीवन है |

जल बचाओ, 
जीवन बचाओ |
जल,जंगल और जमीन, 
ये हों जनता के आधीन |

​मिटटी, पानी ओर बयार,  
ये हैं जीवन के आधार |​

वर्षा जल बचाना है, 
जमीन के दिल में पहुँचाना है |

तालाब-जोहड़-कुओं की करो सफाई, 
वर्षा जल की होगी कमाई |

बूंद-बूंद से घट भरता है, 
बूंद बिना जीवन मरता है |

बूंद- बूंद संजोओ बहन- भाई, 
यह जीवन की नेक कमाई |

पानी चाहिए तो 
अपनी जीवन पद्धति बदलो |

पानी का सदा करो सद उपयोग, 
यह जीवन का सच्चा योग |

रहिमन पानी राखिए, 
बिन पानी सब सून | 
पानी गए ना उबरे, 
मोती, मानुष, चून ||

जब तक समाज में है भरपूर नीर, 
नहीं  होगी किसी को पीर |

जब तक है नदियाँ में नीर, 
दूर रहेगी सबसे पीर |

जब तक नदियाँ में है पानी, 
चलती रहेगी जीवन कहानी |

जब तक है नदी में नीर,
दूर रहेगी समाज से पीर | 

जब तक है नदी सदानीरा,
समाज में नहीं होगी पीड़ा |

नेता-अफसर पेट के काले, 
बेच  रहे है नदियाँ, नाले |

नदी का पानी गन्दा है, 
यह बड़ा बन गया धंधा है |

नदी मेरी आन है, 
पहाड़ मेरी शान है |

जंगल मेरी जान है, 
मनुज की पहचान है |

पेड़ पाल हरियाली लाओ, 
पर्यावरण को सब मिलकर बचाओ |




 [ ये नारे हमें ‘यमुना खड़ी बाज़ार में’ पुस्तक के लेखक तथा तत्व प्रचार केंद्र, गांधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली के संयोजक श्री रमेश चन्द शर्मा जी ने प्रेषित किये. हम आभारी हैं. : पानी पोस्ट टीम ]