( सूखे के संकट समय में बारिश की नन्ही बूंदों के संचयन में समाधान को शब्द देने की कोशिश में श्रीमती शालिनी तिवारी के हाथों सहज ही रच गई एक कविता : पानी पोस्ट टीम )

बूंद-बूंद जब संचयन होगा
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जल से कल था, आज भी है औ
आने वाला समय रहेगा।
यह सम्भव पर तभी है प्यारे,
बूंद-बूंद जब संचयन होगा।।


धरती को यह तृप्त है करता,
मानव को जल जीवित रखता
करे प्रकृति का पोषण प्यारे,
पर्यावरण भी निर्मल होगा।
गौर करे जल-हल रिश्ते का,
धरा अखण्ड का आधार है न्यारा
यह सम्भव पर तभी है प्यारे,
बूंद-बूंद जब संचयन होगा।।


सच की सोच करें सब कोई,
बचा-बचा कर करें उपभोग।
इस धरती पर तङप रहे हैं, 
सूखे से बदहाल हैं लोग।।

सूखे वृझ, ढूढ़ते पंछी, 
पथिक मांगते शीतल क्षीर।
कृषक की उम्मीद सधी मन,
इससे समृद्ध जीवन होगा।

पीर मिटाये, हमे बसाये,
जल से जल का दान महान।
यह सम्भव पर तभी है प्यारे,
बूंद-बूंद जब संचयन होगा।।


प्रकृति अस्मिता पर देख प्रहार,
धरा लगाती मूक गुहार।
नदियां करती हैं चीत्कार,
संतानों से मां लाचार।।

आंख खोल, अब सजग हो प्यारे,
अधिकाधिक जल बचाना होगा।
प्रभु प्रदत्त वर्षाजल अमृत है,
इसे जीवन सा संजोना होगा।

पशु-पंछी, दरख्त-मनुज जल,
समान अधिकार दिलाना होगा।
यह सम्भव पर तभी है प्यारे,
बूंद-बूंद जब संचयन होगा।।

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रचनाकार संपर्क  : shalinitiwari1129 @gmail.com 
————————————————————————————————————फोटो साभार : rainwaterharvesting.org, windandwaterfengshui.com