प्रेस विज्ञप्ति
दिनांक 25 जुलाई, 2016, मातृसदन, हरिद्वार

विरोध करेगा  मातृसदन 

यह प्रमाणित तथ्य है कि गंगाजी में एक भी पत्थर उपर से बहकर / लुढ़कर हरिद्वार में नहीं आता है। इस बात को स्वयं केन्द्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, नई दिल्ली ने जाँच में प्रमाणित किया है। वर्ष 2011 एवं पुनः 2012 में माननीय उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने उत्तराखण्ड सरकार को समस्त स्टोन क्रेशरों को गंगाजी से 05 किलोमीटर दूर हटाने के लिये कहा है।
दिनांक 16 फरवरी, 2015 को जिलाधिकारी हरिद्वार ने पत्र लिखकर शासन को इस सम्बन्ध में कार्यवाही करने को कहा है कि यदि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार स्टोन क्रेशरों को गंगाजी से 05 किलोमीटर दूर हटा दिया जायेगा, तो अवैध खनन पर अंकुश लगाने में सहायता मिलेगी. लेकिन श्री हरीश रावत जी ने समस्त तथ्यों को दरकिनार कर गंगा किनारे कई नये स्टोन स्टोन क्रेशर स्थापित करवा दिए, जो दिन-रात अवैध खनन करते हैं। 

यह तथ्य है कि इतने दिनों तक खनन माफियाओं और स्टोन क्रेशर माफियाओं द्वारा गंगाजी और किनारे को खोदकर गड्ढ़ों में तब्दील किया जाता रहा है और अब, जब के जाँच में यह बात प्रमाणित हो चुकी है कि पत्थर ऊपर  से नहीं आता है, उसके बाद भी उत्तराखण्ड के मुख्यमन्त्री श्री हरीश रावत जी तोते की तरह माफियाओं द्वारा कही जा रही बातों को रटते रहे और कभी ड्रेजिंग, तो कभी समतलीकरण इत्यादि के नाम पर खनन की पैरवी करते रहे। जब कोई कानूनी माध्यम शेष नहीं बचा, तो स्वयं श्री हरीश रावत जी ने अवैध खनन यानी चोरी को नियमित करने का बिल दिनांक 23 जुलाई को विधानसभा में पेश कर दिया।
श्री हरीश रावत जी अवैध खनन को ,एक तरफ तो कभी न रुकने वाला  गैर-कानूनी कार्य मानते हैं, दूसरी तरफ जो इस कार्य को रोकता है, उसे  हरिद्वार से तत्काल हटा देते हैं। हरिद्वार के पूर्व जिलाधिकारी श्री पाण्डियन एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री दाते जी ने अवैध खनन पर अंकुश लगा दिया था। राष्ट्रपति शासन के समय जो अवैध खनन पूर्ण रूप से बन्द हो गया था, श्री हरीश रावत जी का सत्ता में आते ही वह पुनः शुरु हो गया। अब जो कार्य श्री हरीश रावत जी ने किया है, वह अपने आप में माफियापरस्ती की समस्त सीमाओं को तोड़ रहा है।

दिनांक 23 जुलाई, 2016 को श्री हरीश रावत जी ने स्वयं एक बिल इस आशय का पेश किया। बिल में कहा गया है कि चूँकि अवैध खनन नहीं रुक रहा है, इसलिये खनन एवं स्टोन क्रेशर माफियाओं द्वारा की जाने वाले चोरी को नियमित कर दिया जाये यानि ‘चोरी नियमितीकरण बिल’ स्वयं मुख्यमन्त्री श्री हरीश रावत जी ने पेश किया। पूरे भारतवर्ष कौन कहे पूरे विश्व में शायद ही कहीं इस तरह का बिल पेश किया गया होगा, जिसमें राज्य के मुख्यमन्त्री ने अपनी अक्षमता / भ्रष्टाचार को छिपाने के लिये चोरी को नियमित करने का बिल स्वयं पेश किया हो। देवभूमि उत्तराखण्ड की यह विडम्बना ही है कि राज्य के मुखिया माफियापरस्ती की हद पार कर रहे हैं ।  प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रानिक्स मीडिया चुप्पी साधे हुए है।

यहाँ यह स्पष्ट कर देना उचित जान पड़ता है कि मातृ सदन के प्रतिनिधि सहित 06 गणमान्य लोगों का एक प्रतिनिधिमण्डल दिनांक 04 मार्च, 2016 को श्री हरीश रावत जी से मिला था। उसी क्रम में दिनांक 18 मार्च, 2016 को एक शासनादेश जारी कर रायवाला से भोगपुर तक खनन प्रतिबन्धित करते हुए क्षेत्र के सुरक्षार्थ एक वैज्ञानिक दल का गठन कर मानसूनपूर्व एवं मानसूनपश्चात मौका मुआयना करने का निश्चय किया गया था। यहाँ उल्लेखनीय है कि रायवाला से अजीतपुर बन्धा तक के क्षेत्र को सन् 1952 में ही खनन निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया जा चुका है, जिसे कुम्भ मेला में आने वाले करोड़ों की भीड़ को देखते हुए बढ़ाकर भोगपुर तक किया जाना है। माफियाओं को जैसे ही इस बात की सूचना मिली, वे अपने आका श्री हरीश रावत जी से मिले और भारी लेन-देन हुआ। उसके पश्चात वैज्ञानिक दल का गठन नहीं हुआ, बल्कि कैबिनेट ने स्वास्थ्य मन्त्री श्री सुरेन्द्र सिंह नेगी जी को उक्त क्षेत्र में खनन होने अथवा नहीं होने हेतु जनसम्पर्क करने को कहा और श्री नेगी जी ने खनन एवं स्टोन क्रेशर माफिया तथा उनके द्वारा पोषित कथित सन्तों से मुलाकात की। मातृ सदन से सम्पर्क नहीं किया। 

जिस समय उन्होंने सम्पर्क की बात की थी, उस समय परमादरणीय श्री गुरुदेव पूर्व घोषित गंगा यज्ञ में 01 से 15 जून तक व्यस्त थे। श्री नेगी जी को 01 बजे के बाद आने को कहा गया और श्री गुरुदेव दोपहर 01 से 04 बजे तक उनका इन्तजार करते रहे, लेकिन वह  नहीं आये। पत्रों के माध्यम से उन्हे समस्त तथ्यों से अवगत कराकर उचित समय देने को कहा गया। यद्यपि इसी बीच माफियापोषित सन्तों के साथ मेला नियन्त्रण कक्ष में मीटिंग के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय हरित् अधिकरण को ‘भयानक जानवर’  की संज्ञा देने का असंवैधानिक कृत्य भी किया औ अब श्री हरीश रावत जी ने स्वयं चोरीकरण का बिल पेश कर दिया है।

यह कुम्भ नगरी, तीर्थ नगरी और धर्म नगरी हरिद्वार और गंगाजी को बर्बाद करने का प्रयास है, जिसे मातृ सदन कभी बर्दाश्त नहीं करेगी और आवश्यकता पड़ने पर बलिदान भी देगी। 
————————————————————————————————————————–

फोटो साभार  : ndtv.com, tribuneindia.com, indianexpress.com