प्रस्तोता: अरुण तिवारी

उन्होने 30 जुलाई से नर्मदा के जल और ज़मीन के हुकूक के लिए सत्याग्रह करना तय किया है। इसकी तैयारी के लिए वे उन्होंने 13 जुलाई से 15 जुलाई तक नर्मदा परिक्रमा की। 21  से 23 जुलाई को नर्मदा किनारे वाहन यात्रा की योजना है। 19 से 22 जुलाई के बीच का कार्यक्रम भी तैयार किया गया है।

उनकी चिंता

नर्मदा घाटी दुनिया की सबसे पुरानी संस्कृति है। हरदूद जैसे शहर के उजङने से वे डर गये हैं। उन्हे चिंता है कि 30 बङे और 135 छोटे मझोले बांधों के कारण आगे चलकर नर्मदा नदी तालाबों में तब्दील हो जायेगी। इससे लोगों के साथ-साथ नर्मदा घाटी की उपजाऊ खेती, फलदायी वानिकी, मंदिर, मस्ज़िद, पाठशाला, कारीगरी, व्यापार और नर्मदा की संस्कृति का नाश होगा।

सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई 138.68 मीटर किए जाने को लेकर भी वे चिंतित है। कहते हैं कि ऊंचाई 122 मीटर होने पर ही 177 गांव प्रभावित हुए थे। वर्ष 2013 में नदी के पानी द्वारा पलटकर वार करने के कारण कई गांव, मोहल्ले और खेती डूबी थी।

उनके सवाल

वे कह रहे हैं कि अदालत में शासन ने झूठ बोला है। हकीकत में 50 हजार परिवारों के पुनर्वास का कार्य अभी भी अधूरा है। 14 हजार परिवारों को गुजरात और महाराष्ट्र में बसाया गया है, लेकिन मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के पहाङी आदिवासी क्षेत्रों के करीब 1500 परिवार तथा मैदानी मध्य प्रदेश के करीब 45 हजार परिवारों को अभी बसाना बाकी है। सरदार सरोवर में जैसे ही गेट लगेगा, एक धर्मपुरी नगर, 244 गांवों के बाशिंदों के घर, खेत, खलिहान… सब डूब जायेंगे।
संप्रग शासनकाल में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय को लिखित आश्वासन दिया था कि विस्थापितों का पुनर्वास कार्य पूर्ण होने तक बांध कार्य रोका जायेगा, किंतु मोदी सरकार ने उस आश्वासन का मान नहीं रखा। वे सर्वोच्च न्यायालय के फैसले तथा प्रगतिशील पुनर्वास नीति व योजना को नकार कर बांध के काम को आगे बढ़ा रहे हैं। वे सवाल कर रहे हैं कि विकास के नाम पर इन्हे डुबोना कितना न्यायोचित है ? क्या हम इस डूब को मंजूर करें ??

उनके आरोप 

वे पुनर्वास में भष्ट्राचार की आंशका भी जताते हैं।

उनका यह भी आरोप है कि यह सब कच्छ और सौराष्ट्र के सूखाग्रस्त गांवों और सिंचाई के लिए तरसते किसानों को नहीं, बल्कि कोकाकोला, अम्बानी और अडाणी के उद्योगों को पानी देने के लिए किया जा रहा है। कोकाकोला के साथ 30 लाख लीटर प्रतिदिन, मोटरकार फैक्टरियों को 60 लाख लीटर प्रतिदिन और चार लाख हेक्टेयर के इंडस्ट्रीयल काॅरीडोर को अधिकांश पानी देने का अनुबंध है।

वे आरोप लगाते हैं कि सरकार के पास नहरों का काम पूरा करने के लिए पैसे नहीं है। अभी तक मात्र 30-40 प्रतिशत नहरें ही बनाई गईं हैं, किंतु बांध के लागत मूल्य को 4200 करोङ रुपये से बढ़ाकर 90,000 करोङ रुपये करने की अधिकृत घोषणा कर दी गई है।

सरदार सरोवर बांध के कारण महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की अकूत संपदा डूबी; विस्थापन हुआ; बावजूद इसके सरदार सरोवर जलाश्य के जल की एक बूंद पर भी इन्हे अधिकार नहीं दिया गया। उलटे गुजरात ने अपने पावर हाउस को बंद रखने की एवज में हुए नुकसान की भरपाई हेतु मांग पेश कर दी है। वे इस भेदभाव से नाराज हैं।

उनकी मांग

अपनी नाराजगी, आरोप और ऐतराज के बीच उनकी एक कई मांग हैं:

1. बिना पुनर्वास किसी की संपत्ति डुबाई न जाये।
2. यह सुनिश्ति करने के लिए सरदार सरोवर के गेट बंद न किए जायें।
3. 2013 के नये भूमि अधिकार कानून केे अनुसार, विस्थापितों की संपत्ति पर उनका मालिकाना हक मंजूर किया जाये।
4. मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात की सरकारें पुनर्वास को लेकर अदालत में सही जानकारीयुक्त शपथ पत्र दाखिल करें।
5. जिनका पुनर्वास बाकी है, पुनर्वास स्थल पर पूरी सुविधा व आजीविका साधनों के साथ पुनर्वास कार्य पूरा किया जाये।
6. मध्य प्रदेश पुनर्वास में भ्रष्टाचार के संबंध में झा आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करें और दोषियों पर कार्रवाई करें।
7. बांध का लाभ उद्योगपतियों की बजाय, किसानों, आदिवासियों व सूखाग्रस्त क्षेत्रों को मिलना सुनिश्चित किया जाये।
8. नर्मदा से पानी उठाकर क्षिप्रा, गंभीर, मही और कालीसिंध में डाला जा रहा है। निकाले जा रहे पानी की मात्रा 5,000 से 15,000 लीटर प्रति सेकेण्ड हैं। वे कहते हैं कि इससे तो नर्मदा का अस्तित्व ही संकट में पङ जायेगा। अतः उनकी एक प्रमुख मांग नर्मदा के अस्तित्व को बचाये रखने की भी है।

उनकी अपील 

उन्होने अपील की है कि देशभर के वैकल्पिक विकास, मानवाधिकार, नर्मदा भक्त, संवेदनशील नागरिक व जनसंगठन इस सत्याग्रह को शक्ति प्रदान करने केे इसमें शामिल हों और अपने आने की सूचना दें। आप जानना चाहेंगे कि ये कौन हैं।

कौन हैं ये ?

संभावना इंस्टीटयुट की ई मेल से प्राप्त आमंत्रण में यद्यपि किसी संगठन का नाम नहीं दिया है, किंतु असल में ये हैं नर्मदा बचाओ आंदोलन के मुखर आंदोलनकारी। आमंत्रण में  ‘आपके विनीत’ के रूप में बहन मेधा पाटकर, भागीरथ धनगर, कैलाश यादव, मोहनभाई पाटीदार, सनोबरबी मन्सुरी, श्यामा मछुआरा, बाला यादव, रमेश प्रजापति, देवीसिंह तोम, जीकुभाई तडवी, रतन वसावे, बाला तडवी, पुन्या वसावे,  नूरजी पाडवी, चेतन साल्वे और विजय वल्वी के नाम है।

शामिल होने के इच्छुक संपर्क करें 

विमलभाई (दिल्ली) – 9718479517,
शबनम (दिल्ली) – 9643349452,
राहुल यादव – 9179617513,
अश्विन (बङवानी) – 8754491150,
चेतन साल्वे – 9420375730,
लतिका – 942015384,
योगिनी – 9423944390,
परवीन जहांगीर   (मुंबई)- 9820636335,
विजया चैहान (मुंबई) – 9820236237,
सुनीति  (पुणे) – 9423571784,
शाम पाटिल, धुले – 9423496020,
प्रमोद बागङी (इंदौर) – 9827021000
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फोटो साभार : संघर्षसंवाद.ऑर्ग