हमारी मांग : नर्मदा सेवा यात्रा का हिसाब और हासिल  बतायें

 

सिंहस्थ के बाद एक और खर्चीला कार्यक्रम मुख्यमंत्री शिवराज सिंहजी ने चलाया, वह था ‘नर्मदा सेवा यात्रा’ का। इस यात्रा में स्थानीय लोगों ने कही खाना खिलाया भी हो, तो भी करोडों का खर्च एकआम सभा पर। बडवानी जिला स्तर की एक मीटिंग ही करोड़ों की हुई । मीटिंग के लिए मात्र लाखों रूपये खर्चकर एक शौचालय बना दिया था। हर वक्त मुख्यमंत्री का हेलिकाप्टर से आना-जाना लाखो रू का, किसी भूमिहीन को जमीन दिलाने काम आये इतना खर्च, था ही।

दिखावा

बीती 15 मई को अमरकंटक में लाख डेढ लाख लोग एकत्रित कर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने दावा किया नर्मदा घाटी हरित बनाने का प्रदूषणमुक्त व शराबमुक्त कराने का तथा अवैध रेत खनन रोकने का। यात्रा भर यही घोषणाए, यही आश्वासन, यही दावे करते हुए जिन गांवों से मुख्यमंत्री गुजरे थे, उनमें से किसी भी गांव में, बडवानी, धार, या अलिराजपुर जिले के न कोई दारू की दुकान उजड़ी और न ही कोई अवैध खनन बंद किया गया । शराब माफिया, रेत खनन माफिया, तथा फर्जी रजिस्ट्री घोटाला और घरप्लाट आवंटन में धांधली करने वालों ने मिलकर ही तो यात्रा कार्यक्रम आयेाजन किया… तो नतीजा और क्या होना था?

साज़िश 

नर्मदा यात्रा के समारोह में जरूर बाते हुईं पर्यावरण और नर्मदा बचाने की, लेकिन यहां तो नर्मदा घाटी के पीढियों पुराने गांवों को, कुछ दशलक्ष पेडों को, सैकडों मंदिरो-मस्जिदों को कत्ल-ए आम होने की तैयारियां जोरों पर हैै।

बड़वानी  जिलाधिकारियेां ने 8200 परिवारों को, धार जिले के 6132 परिवारों को और खरगोन, अलिराजपुर के भी हजारों परिवारों को आज के उनके भरे पूरे गांवों से, खेत खलिहान, व्यवसायों सेहटाकर, उजाडकर बेघर करने की बात, उसके लिए पुलिसबल लगाने की बात जाहीर की है। गांव-गांव पहुचकर पुलिस ले रहे हैं अंदाज, तैयार कर रहे है रोडमेप।

लाखो पेडों को काटना, हजारो घरों के साथ सैकडो मंदिरों, दसौ मस्जिदों को हटाना, पाठशालाऐ, धर्मशालाए, दुकाने, बाजार खाली करवाना एक अघोरी कृत्य मा. प्रधानमंत्री और केंन्द्र शासन, गुजरात, म0प्र0 और महाराष्ट्र की भाजपा की अपनी सरकारों को साथ लेकर करने जा  रहे   है।

नर्मदा किनारे चल रहे अखंडित अवैध रेत खनन, बिना निकास व्यवस्था की बनी नहरों से खेती बरबादी और नर्मदा का पानी कंपनियों की ओर मोड़ने  की, कोका कोला के नये संयंत्र,  ताप विद्युत औरचुटका अणुउर्जा परियोजनाओं की भरमार के बाद नर्मदा को ही समाप्त करने का मार्ग तो इन्होने अपनाया है। आज भी उसी पर सत्ता यात्रा आगे बढ़ाने  का राजनीतिक खेल है ‘नमामि देवी नर्मदे’ का। नर्मदा की लूट, नर्मदा भक्त घाटी निवासीयों पर हमले की छूट और अपनी सारी किसान मजदूर विरोधी, प्रकृति विरोधी नीति निर्णयों को छिपाने की साजिश लेक रपधारे  प्रधानमंत्री। नर्मदा घाटी के  लोगों  ने  मात्र रास्ते पर उतरकर इसे चुनौती दी।

क्या अब मां नर्मदा ही सबक सिखाएगी?

 

डूब की खिलाफत और जनतंत्र, न्याय और अहिंसक विकास की चाहत लेकर इन्दौर पहुंचे नर्मदा किनारे के  सैकड़ों  प्रतिनिधि

सम्पर्क 9179617513/9826811982

पेमल बहन,      सरस्वती बहन,      कैलाश अवास्या,       भागीरथ धनगड़,

राहुल यादव,     मुकेश भगोरिया,     मेधा पाटकर

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