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आज का लेख

आज का लेख, प्रकृति लेख, समय विशेष

विश्व पर्यावरण दिवस – 2019

हम हवा में इतना कचरा फेंक रहे हैं कि भारत के सौ से अधिक शहर वायु गुणवत्ता परीक्षा में फेल हो गए और श्वसन तंत्र की बीमारियों से मरने वालों के औसत में भारत, दुनिया का नबंर वन हो गया है। इन परिस्थितियों के मूल कारण क्या हैं ?

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आज का लेख, समय विशेष

…पर पानी संजोना कब मना है ?

समाज ने यह मान लिया है कि पानी का इंतज़ाम करना, सरकार का काम है; वही करे। इस चित्र को उलटना होगा। न भूलें कि बारिश आती है, तो वह किसी की प्रतीक्षा नहीं करती। हम भी न करें।

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आज का लेख, जलतरंग

तब हर पल होली हो जाता है…

अरुण तिवारी जब घुप्प अमावस के द्वारेकुछ किरणें दस्तक देती हैं,सब संग मिल लोहा लेती हैं,कुछ शब्द, सूरज बन जाते हैं, तब नई सुबह हो जाती है,नन्ही कलियां मुसकाती हैं,हर पल नूतन हो जाता है,हर पल उत्कर्ष मनाता है, तब मेरे मन की कुंज गलिन मेंइक भौंरा रसिया गाता है,पल-छिन…

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आज का लेख, नदी लेख

क्या गंगा को सिर्फ चुनावी वाहन मानने वालों को अपना प्रतिनिधि चुनें ?

गंगा के सहारे चुनावी नौका पार करना, 2014 के प्रधानमंत्री पद के दावेदार श्री मोदी का एजेण्डा था। 2019 चुनाव में अब यह राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की अपील करने वाली प्रियंका गांधी का एजेण्डा है।

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आज का लेख, नदी लेख

गंगा शहीदों की मांगों पर संकल्प कब ?Featured

सरकार का यह रवैया दुःखद है। क्या गंगा और गंगा बलिदानियों को लेकर प्रधानमंत्री जी के रवैये को हम जायज़ कह सकते हैं ? मां गंगा और भारत माता को लेकर हुई शहादत-शहादत में फर्क करने के हमारा रवैया कितना जायज़ है ? मांग है कि हम चुप्पी तोडे़ं। हम समझें कि गंगा की अविरलता की मांग, गंगा की सुरक्षा से ज्यादा हमारी सेहत, रोज़ी-रोटी, भूगोल, आर्थिकी, आस्था और भारतीय अस्मिता की सुरक्षा से जुड़ी मांग है। इसीलिए मांग है कि हम मुखर हों और शासन-प्रशासन को गंगा तथा गंगा की सुरक्षा के प्रति अनशतरत् संतानों के प्रति संवेदनशील और ईमानदार होने को विवश करें।

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Uncategorized, आज का लेख, जलतरंग, नदी लेख

पुलवामा घात में अमर हुए सी आर पी एफ के शहीदों को नमन करते हुए एक गंगा प्रश्न

उन को वंदन, उन पर क्रंदन,
बदला-बदले की आवाज़ें,
शत्-शत् करती मैं उन्हे नमन्,
पर इन पर चुप्पी कितनी जायज़,
खुद से पूछो, खुद ही जानो,
खुद का करतब पहचानो,
मैं गंगा तुम से पूछ रहीं…

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आज का लेख, जलतरंग, पानी लेख, प्रकृति लेख

पानी प्रणय पक्ष

लेखक : अरुण तिवारी आतुर जल बोला माटी सेमैं प्रकृति का वीर्य तत्व हूं,तुम प्रकृति की कोख हो न्यारी।इस जगती का पौरुष मुझमें,तुममें रचना का गुण भारी।नर-नारी सम भोग विदित जस,तुम रंग बनो, मैं बनूं बिहारी।आतुर जल बोला माटी से…. न स्वाद गंध, न रंग तत्व,पर बोध तत्व है अनुपम…

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आज का लेख, जलतरंग, प्रकृति लेख

मैं देवदार का घना जंगल

लेखक: अरुण तिवारी मैं देवदार का घना जंगल,गंगोत्री के द्वार ठाड़ा,शिवजटा सा गुंथा निर्मलगंग की इक धार देकर,धरा को श्रृंगार देकर,जय बोलता उत्तरांचल की,चाहता सबका मैं मंगल,मैं देवदार का घना जंगल… बहुत लंबा और ऊंचा,हिमाद्रि से बहुत नीचा,हरीतिमा पुचकार बनकर,खींचता हूं नीलिमा को,मैं धरा के बहुत नीचे, सींचता हूं खेत को…

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