Category

जलतरंग

आज का लेख, जलतरंग, नदी लेख, समय विशेष

गंगा तट से बोल रहा हूं : अरुण तिवारी

हंसा तो तैयार अकेला , तय अब हम को ही करना है  स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (प्रो जी डी अग्रवाल जी ) के गंगा अनशन (वर्ष 2013) पर छाई चुप्पी से व्यथित होकर अनशन के 100वें दिन श्री अरुण तिवारी ने एक अत्यंत मार्मिक आहृान किया था। मातृ सदन के स्वामी शिवानंद जी के अनशन पर हरिद्वार प्रशासन ने जिस प्रकार…

Continue reading
आज का लेख, जलतरंग, नदी लेख, पानी लेख, प्रकृति लेख, समय विशेष

२२ अप्रैल -पृथ्वी दिवस पर विशेष : भाग – 01

    धरती  बेहद उदास है..  रचनाकार :  अरुण तिवारी    कहते हैं, इन दिनों  धरती बेहद उदास है  इसके रंजो-गम के कारण  कुछ खास हैं। कहते हैं, धरती को बुखार है;  फेफङें बीमार हैं। कहीं काली, कहीं लाल, पीली, तो कहीं भूरी पङ गईं हैं  नीली धमनियां। कहते हैं, इन दिनों….   कहीं चटके…  कहीं गादों से भरे हैं …

Continue reading
आज का लेख, जलतरंग, समय विशेष

श्रीरामनवमी विशेष : रामचरित

भजियो रामचरित मन धरियो.. रचनाकार : अरुण तिवारी   भजियो रामचरित मन धरियो, तजियो जग की तृष्णा तजियो। परहित सदा धर्म सम धरियो, मरियो, मर्यादा पर मरियो।। भजियो रामचरित…. भाई संग सब स्वारथ तजियो संगिनी बन दुख-सुख सम रहियोे। मातु-पिता कुछ धीरज धरियो सुत सदा आज्ञा-पालन करियो।। भजियो रामचरित… सेवक सखा समझ मन भजियो शरणागत की रक्षा करियो। धोखा काहू संग…

Continue reading
Uncategorized, जलतरंग

बूंद-बूंद संचयन के प्रेरणा बोल

( सूखे के संकट समय में बारिश की नन्ही बूंदों के संचयन में समाधान को शब्द देने की कोशिश में श्रीमती शालिनी तिवारी के हाथों सहज ही रच गई एक कविता : पानी पोस्ट टीम ) बूंद-बूंद जब संचयन होगा—————————– जल से कल था, आज भी है औ आने वाला समय रहेगा। यह सम्भव पर तभी है प्यारे, बूंद-बूंद जब संचयन होगा।।…

Continue reading
Uncategorized, जलतरंग

इन दिनों धरती बेहद उदास है……..

 रचनाकार : अरुण तिवारी ————————————————————– कहते हैं, इन दिनों धरती बेहद उदास है। इसके रंजो-ग़म के कारण कुछ खास हैं। कहते हैं, धरती को बुखार है; फेफङे बीमार हैं। कहीं काली, कहीं लाल, पीली, तो कहीं भूरी पङ गईं हैं नीली धमनियां। कहते हैं, इन दिनों…. कहीं चटके…कहीं गादों से भरे हैं आब के कटोरे। कुंए हो गये अंधे बोतल…

Continue reading
Uncategorized, आज का लेख, जलतरंग, समय विशेष

मां, पीर तो होती होगी

आठ मई – मातृ दिवस पर विशेष ( मां की बहादुरी और बेबसी से एक साथ आत्म साक्षात्कार की कोशिश में अरुण तिवारी  जी  के हृदय की कुछ वेदना शब्दों में उतर आई है। प्रस्तुत वेदना शहर में जा बसी संतानों की माताओं का भी सच  है और माँ की खातिर, संतानों द्वारा अपनी निजी आकांक्षाओं का त्याग न कर पाने की बढ़ती प्रवृति का भी सच. …

Continue reading
Uncategorized, आज का लेख, जलतरंग

नारों में पानी संग हम

…………………………………………………….फोटो साभार : indialocation.in……………………………………………… जल ही जीवन है | जल बचाओ,  जीवन बचाओ | जल,जंगल और जमीन,  ये हों जनता के आधीन | ​मिटटी, पानी ओर बयार,   ये हैं जीवन के आधार |​ वर्षा जल बचाना है,  जमीन के दिल में पहुँचाना है | तालाब-जोहड़-कुओं की करो सफाई,  वर्षा जल की होगी कमाई | बूंद-बूंद से घट भरता है, …

Continue reading
Uncategorized, आज का लेख, जलतरंग

एक कविता

छोटी बूँद की बड़ी कहानी     रचनाकार: रमेश चन्द्र शर्मा बूंद बड़ी मतवाली है,  भरती धरती की प्याली है। एक जगह न जड़ जमाएं, उड़ती चलती बहती जाएँ। पहुंचे जहाँ जीवन फैलाए, जीवन में हरियाली लाएं। बच्चे भीगें शोर मचाएं, पेड़–पौधे-जीव–जंतु नहाएं। बूंद बने बहता पानी, जीवन की हुई शुरु कहानी। सागर से उठी बदली में आई, रूप बदल फूले न समाई। बदली छोड़ बूंद बन धाई, धरती माँ ने गोद फैलाई। बूंदें मिलकर बन गया जल, नाच उठा नभ और थल। ऐसी सधी जल की धारा, उद्गम नदी मात का प्यारा। नदी–नाले–पोखर भर जाएँ, धरती माँ की प्यास बुझाए। धरती माँ में बूंद समाई, भंडार की खूब हुई कमाई। जल का सच्चा बजट औ खाता, इसे बढ़ाती नदिया माता। रखो सदा इसे आज़ाद, नहीं करो कभी बर्बाद। बिना इसके है जीवन रुखा,धरती पर पडे है सूखा। बचत खाता काम आए, जीव– जगत की जान बचाए। बूंद–बूंद से बनता पानी, छोटी बूँद की बड़ी कहानी। ……………………………………………………………………………………………………………………………………………  { रचनाकार, तत्व प्रचार केंद्र – गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र, नई दिल्ली के समन्वयक हैं.}  संपर्क : 9868221950    

Continue reading
Uncategorized, आज का लेख, जलतरंग

आज के सवाल हैं कि आज ही जवाब दो…..

——————————————————————————————————————— रचनाकार: अरुण तिवारी ————————————————————————————————————————- जल रही मशाल है  कि उठ रहे सवाल हैं कि आज के सवाल हैं  कि आज ही जवाब दो। नदी जिये या जल मरें, बची रहे श्री सदा ऐसा भी कमाल हो, सत्ता ही दलाल हों, तो क्यों न ईमान पे सवाल हो ? जल रही मशाल है…     चुन गये तो क्या तुम्हीं…

Continue reading