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जलतरंग

आज का लेख, जलतरंग, समय विशेष

मां, पीर तो होती होगी

  आठ मई – मातृ दिवस पर विशेष ( मां की बहादुरी और बेबसी से एक साथ आत्म साक्षात्कार की कोशिश में अरुण तिवारी  जी  के हृदय की कुछ वेदना शब्दों में उतर आई है। प्रस्तुत वेदना शहर में जा बसी संतानों की माताओं का भी सच  है और माँ की खातिर, संतानों द्वारा अपनी निजी…

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आज का लेख, जलतरंग

नारों में पानी संग हम

जल ही जीवन है | जल बचाओ, जीवन बचाओ |जल,जंगल और जमीन, ये हों जनता के आधीन | मिटटी, पानी ओर बयार,  ये हैं जीवन के आधार |​ वर्षा जल बचाना है, जमीन के दिल में पहुँचाना है |तालाब-जोहड़-कुओं की करो सफाई, वर्षा जल की होगी कमाई | बूंद-बूंद से घट भरता है, बूंद बिना…

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आज का लेख, जलतरंग

एक कविता

छोटी बूँद की बड़ी कहानी     रचनाकार: रमेश चन्द्र शर्मा बूंद बड़ी मतवाली है,  भरती धरती की प्याली है। एक जगह न जड़ जमाएं, उड़ती चलती बहती जाएँ। पहुंचे जहाँ जीवन फैलाए, जीवन में हरियाली लाएं। बच्चे भीगें शोर मचाएं, पेड़–पौधे-जीव–जंतु नहाएं। बूंद बने बहता पानी, जीवन की हुई शुरु कहानी। सागर से उठी बदली में आई, रूप बदल फूले न समाई। बदली छोड़ बूंद बन धाई, धरती माँ ने गोद फैलाई। बूंदें मिलकर बन गया जल, नाच उठा नभ और थल। ऐसी सधी जल की धारा, उद्गम नदी मात का प्यारा। नदी–नाले–पोखर भर जाएँ, धरती माँ की प्यास बुझाए। धरती माँ में बूंद समाई, भंडार की खूब हुई कमाई। जल का सच्चा बजट औ खाता, इसे बढ़ाती नदिया माता। रखो सदा इसे आज़ाद, नहीं करो कभी बर्बाद। बिना इसके है जीवन रुखा,धरती पर पडे है सूखा। बचत खाता काम आए, जीव– जगत की जान बचाए। बूंद–बूंद से बनता पानी, छोटी बूँद की बड़ी कहानी। ……………………………………………………………………………………………………………………………………………  { रचनाकार, तत्व प्रचार केंद्र – गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र, नई दिल्ली के समन्वयक हैं.}  संपर्क : 9868221950    

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आज का लेख, जलतरंग

आज के सवाल हैं कि आज ही जवाब दो…..

——————————————————————————————————————— रचनाकार: अरुण तिवारी ————————————————————————————————————————- जल रही मशाल है कि उठ रहे सवाल हैं कि आज के सवाल हैं  कि आज ही जवाब दो। नदी जिये या जल मरें,बची रहे श्री सदा ऐसा भी कमाल हो, सत्ता ही दलाल हों, तो क्यों न ईमान पे सवाल हो ? जल रही मशाल…

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आज का लेख, जलतरंग

गंगा तट से बोल रहा हूं

तय अब हमको ही करना है… स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (प्रो जी डी अग्रवाल जी ) के गंगा अनशन (वर्ष 2013) पर छाई चुप्पी से व्यथित होकर अनशन के 100वें दिन श्री अरुण तिवारी द्वारा किया गया एक अत्यंत मार्मिक आहृान हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं। कृपया पढ़े और गंगाजी…

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जलतरंग

खुशखबरी : स्कूल-स्कूल पहुंचा ‘मां भारती की जलगान’

मां भारती का जलगान’ शीर्षकयुक्त गीत पानी पोस्ट के लेखक श्री अरुण तिवारी द्वारा लिखी एक ऐसी रचना है, जो जल चक्र, जल संरक्षण की भारतीय परंपरा से लेकर जल के महत्व के चित्रलेख को अत्यंत सरलता और सहजता से प्रस्तुत करती है। जल एवम् स्वच्छता मिशन, राजस्थान सरकार की…

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जलतरंग

गंगा प्रश्न

लेखक: अरुण तिवारी ऐ नये भारत के दिन बता……ए नदिया जी के कुंभ बता !!उजरे-कारे सब मन बता !!!क्या गंगदीप जलाना याद तुम्हेया कुंभ जगाना भूल गये ?या भूल गये कि कुंभ सिर्फ नहान नहीं,गंगा यूं ही थी महान नहीं ।नदी सभ्यतायें तो खूब जनी,पर संस्कृति गंग ही परवान चढी।नदियों…

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