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प्रकृति लेख

आज का लेख, नदी लेख, पानी लेख, प्रकृति लेख

समाज का प्रकृति एजेण्डा जगाती एक पुस्तक

  पुस्तक का नाम: समाज, प्रकृति और विज्ञान लेखक: श्री विजयदत्त श्रीधर, श्री राजेन्द्र हरदेनिया, श्री कृष्ण गोपाल व्यास, डाॅ. कपूरमल जैन, श्री चण्डी प्रसाद भट्ट संपादक: श्री राजेन्द्र हरदेनिया प्रकाशक: माधवराव सप्रे स्मृति समाचारप संग्रहालय, एवम् शोध संस्थान, माधवराव सप्रे मार्ग (मेन रोड नंबर तीन), भोपाल (म.प्र.) – 462003 संपर्क :  फोन: 0755-2763406 / 4272590,  ई मेल: [email protected]   पुस्तक…

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गंगोत्री के हरे पहरेदारों की पुकार सुनो

लेखक: सुरेश भाई एक ओर ‘नमामि गंगे’  के तहत् 30 हजार  हेक्टेयर भूमि पर वनों के रोपण का लक्ष्य है तो दूसरी ओर गंगोत्री से हर्षिल के बीच हजारों हरे देवदार के पेडों की हजामत किए जाने का प्रस्ताव है। यहां जिन देवदार के हरे पेडों को कटान के लिये चिन्हित किया गया हैं, उनकी उम्र न तो छंटाई योग्य…

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NAPM निमंत्रण : ‘मुक्त बहने दो’ पुस्तक विमोचन तथा उत्तराखंड में भूमि का सवाल पर चर्चा

जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, उत्तराखंड                      कंडी खाल, पो0 आ0 कैम्पटी वाया मसूरी, टिहरी गढवाल, उत्तराखंड–248179      09718479517, 9927145123 निमंत्रण  10 जून, 2017 शनिवार   समय- 11 बजे से 3.30 तक स्थान- जैन धर्मशाला, निकट प्रिंस चौक, देहरादून, उत्तराखंड                                            …

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अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस २०१७ पर विशेष : जन जुड़ेगा तो बचेगा पर्यावरण

श्री अनुपम मिश्र जी और उनसे परिचय करती भेड़ें : यूँ जुड़े प्रकृति का हर अंग तो कुछ बात बने  आदरणीय / आदरणीया, नमस्ते .   अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस – 2017 का संयुक्त राष्ट्र संघ निदेशित वाक्य है – कनेक्ट विथ नेचर अर्थात प्रकृति से जुड़ें. इसके मायने को खोलता अरुण तिवारी लिखित लेख नवभारत टाइम्स के 05  जून के…

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२२ अप्रैल – पृथ्वी दिवस पर विशेष : भाग 05

कैसे मनायें पृथ्वी दिवस ? लेखक :  अरुण तिवारी  पृथ्वी दिवस – हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 22 अप्रैल को आ ही गया अंतर्राष्ट्रीय मां पृथ्वी का यह दिन। सोचना यह है कि हम इसे कैसे मनायें ? सीधे कहूं तो पृथ्वी दिवस पर दुनियाभर में गोष्ठी, सेमिनार, संवाद, कार्यशालायें आयोजित होती ही हैं। इनमें भाग ले सकते हैं;…

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२२ अप्रैल – पृथ्वी दिवस पर विशेष : भाग 04

भारतीय, इसलिए भी मनायें पृथ्वी दिवस लेखक :  अरुण तिवारी  यूं तो मैं सीधे-सीधे कह सकता हूं कि 22 अप्रैल-पृथ्वी दिवस, सिर्फ संयुक्त राष्ट्र संघ अथवा संयुक्त राज्य अमेरिका से जुङे संगठनों व देशों को पृथ्वी के प्रति दायित्व निर्वाह की याद दिलाने का मौका नहीं है; यह प्रत्येक जीव के याद करने का मौका है कि पृथ्वी के प्रति…

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22 अप्रैल- पृथ्वी दिवस पर विशेष : भाग -03

22 अप्रैल कैसे बना पृथ्वी दिवस ?? लेखक :  अरुण तिवारी  भारतीय कालगणना दुनिया में सबसे पुरानी है। इसके अनुसार, भारतीय नववर्ष का पहला दिन, सृष्टि रचना की शुरुआत का दिन है। आई आई टी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डाॅ. बिशन किशोर कहते हैं कि यह एक तरह से पृथ्वी का जन्मदिन की तिथि है। तद्नुसार इस भारतीय नववर्ष…

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२२ अप्रैल -पृथ्वी दिवस पर विशेष : भाग – 02

धरती की डाक सुनो रे केऊ  लेखक :  अरुण तिवारी    मनुस्मृति के प्रलय खंड में प्रलय आने से पूर्व लंबे समय तक अग्नि वर्षा और फिर सैकङो वर्ष तक बारिश ही बारिश का जिक्र किया गया है। क्या वैसे ही लक्षणों की शुरुआत हो चुकी है ?  तापमान नामक डाकिये के जरिये भेजी पृथ्वी की चिट्ठी का ताजा संदेशा तो…

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२२ अप्रैल -पृथ्वी दिवस पर विशेष : भाग – 01

    धरती  बेहद उदास है..  रचनाकार :  अरुण तिवारी    कहते हैं, इन दिनों  धरती बेहद उदास है  इसके रंजो-गम के कारण  कुछ खास हैं। कहते हैं, धरती को बुखार है;  फेफङें बीमार हैं। कहीं काली, कहीं लाल, पीली, तो कहीं भूरी पङ गईं हैं  नीली धमनियां। कहते हैं, इन दिनों….   कहीं चटके…  कहीं गादों से भरे हैं …

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संप्रदाय नहीं, मुनाफाखोरी है गोवंश की दुश्मन

आस्था बचाने से रुकेगा गोवंश का कत्ल लेखक : अरुण तिवारी  उत्तर प्रदेश में बूचड़खानों को इस आधार पर बंद किया गया कि वे कानूनन अवैध थे। गोरक्षा के नाम पर हिंसात्मक कार्रवाई करने वालों को भी इसी आधार पर चुनौती दी जा रही है कि उनकी हरकत कानूनन अवैध व अमानीवीय है। गोरक्षा के लिए औजार के तौर पर मांग…

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