मैं झरना हूं …
देख मुझे खिलखिला उठी, गट्ठर फेंका, अंजुरी बांधी, प्रेम पगी दृष्टि साधी, फिर ओंठों से मेरा पान किया, चन्द्र चकोरी मुख स्नान किया, वह सींच रही थी खुद को...
देख मुझे खिलखिला उठी, गट्ठर फेंका, अंजुरी बांधी, प्रेम पगी दृष्टि साधी, फिर ओंठों से मेरा पान किया, चन्द्र चकोरी मुख स्नान किया, वह सींच रही थी खुद को...