पानी प्रणय पक्ष

लेखक : अरुण तिवारी आतुर जल बोला माटी सेमैं प्रकृति का वीर्य तत्व हूं,तुम प्रकृति की कोख हो न्यारी।इस...

मैं देवदार का घना जंगल

लेखक: अरुण तिवारी मैं देवदार का घना जंगल,गंगोत्री के द्वार ठाड़ा,शिवजटा सा गुंथा निर्मलगंग की इक धार देकर,धरा को...

स्वामी सानंद इसलिए चाहते थे अविरल गंगा

अरुण तिवारी गंगा की अविरलता की मांग को पूरा कराने के लिए स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ने अपने प्राण तक...

उमा जी सामने होती, तो गर्दन पकङ लेता : स्वामी सानंद

प्रस्तोता: अरुण तिवारी (यह प्रस्तुति, इसी जुलाई के दूसरे सप्ताह में स्वामी सानंद से हुई बातचीत के अंशों पर...

क्यों है खास चातुर्मास ?

लेखक: अरुण तिवारी चातुर्मास का मतलब है, आषाढ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक मास...
आज का लेख, जलतरंग, पानी लेख, प्रकृति लेख
पानी प्रणय पक्ष
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मैं देवदार का घना जंगल
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स्वामी सानंद इसलिए चाहते थे अविरल गंगा
आज का लेख, नदी लेख, संवाद
उमा जी सामने होती, तो गर्दन पकङ लेता : स्वामी सानंद
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क्यों है खास चातुर्मास ?
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क्षमा करना मां गंगे, हमे धिक्कार है !Featured

गंगा दशहरा -12 जून, 2019 पर विशेष

हमें मां गंगा का राजा भगीरथ से कहा आज फिर से याद करने की ज़रूरत है, ”भगीरथ, मैं इस कारण भी पृथ्वी पर नहीं जाऊंगी कि लोग मुझमें अपने पाप धोयेंगे। मैं उस पाप को धोने कहां जाऊंगी ?”

राजा भगीरथ ने आश्वस्त किया था, ”माता, जिन्होने लोक-परलोक, धन-सम्पत्ति और स्त्री-पुरुष की कामना से मुक्ति ले ली है; जो संसार से ऊपर होकर अपने आप में शांत हैं; जो ब्रह्मनिष्ठ और लोकों को पवित्र करने वाले परोपकारी सज्जन हैं… वे आपके द्वारा ग्रहण किए गए पाप को अपने अंग स्पर्श व श्रमनिष्ठा से नष्ट कर देंगे।”
हम क्या कर रहे हैं ?

गंगा की सेहत की अनदेखी कर रही है, हम उनकी जय-जयकार कर रहे हैं।
जो गंगा की चिंता कर रहे हैं, हम उनसे दूर खडे़ हैं।

हम राजा भगीरथ को धोखा दे रहे हैं। क्या उसी कुल में पैदा हुए राजा राम खुश होंगे ?
गंगा आज फिर प्रश्न कर रही है कि वह मानव प्रदत पाप को धोने कहां जाए ?

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मां गंगा जैसी कोई नहींFeatured

12 जून, 2019 – गंगा दशहरा पर विशेष

यह है गंगा का गंगत्व; भारतीय संतानों के लिए मां गंगा का योगदान।

अब दूसरा चित्र देखिए और सोचिए कि गंगा आज भी सुमाता है, किंतु क्या हम भारतीयों का व्यवहार माृतभक्त संतानों जैसा है ?

सच यह है कि गरीब से गरीब भारतीय आज भी अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा खर्च कर गंगा दर्शन को आता है, लेकिन गंगा का रुदन और कष्ट हमें दिखाई नहीं देता। गंगा के साथ मां का हमारा संबोधन झूठा है। हर हर गंगे की तान दिखावटी है; प्राणविहीन ! दरअसल हम भूल गये हैं कि एक संतान को मां से उतना ही लेने का हक है, जितना एक शिशु को अपने जीवन के लिए मां के स्तनों से दुग्धपान।

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गंगा शहीदों की मांगों पर संकल्प कब ?Featured

सरकार का यह रवैया दुःखद है। क्या गंगा और गंगा बलिदानियों को लेकर प्रधानमंत्री जी के रवैये को हम जायज़ कह सकते हैं ? मां गंगा और भारत माता को लेकर हुई शहादत-शहादत में फर्क करने के हमारा रवैया कितना जायज़ है ? मांग है कि हम चुप्पी तोडे़ं। हम समझें कि गंगा की अविरलता की मांग, गंगा की सुरक्षा से ज्यादा हमारी सेहत, रोज़ी-रोटी, भूगोल, आर्थिकी, आस्था और भारतीय अस्मिता की सुरक्षा से जुड़ी मांग है। इसीलिए मांग है कि हम मुखर हों और शासन-प्रशासन को गंगा तथा गंगा की सुरक्षा के प्रति अनशतरत् संतानों के प्रति संवेदनशील और ईमानदार होने को विवश करें।

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विश्व पर्यावरण दिवस – 2019

हम हवा में इतना कचरा फेंक रहे हैं कि भारत के सौ से अधिक शहर वायु गुणवत्ता परीक्षा में फेल हो गए और श्वसन तंत्र की बीमारियों से मरने वालों के औसत में भारत, दुनिया का नबंर वन हो गया है। इन परिस्थितियों के मूल कारण क्या हैं ?

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…पर पानी संजोना कब मना है ?

समाज ने यह मान लिया है कि पानी का इंतज़ाम करना, सरकार का काम है; वही करे। इस चित्र को उलटना होगा। न भूलें कि बारिश आती है, तो वह किसी की प्रतीक्षा नहीं करती। हम भी न करें।

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तब हर पल होली हो जाता है…

अरुण तिवारी जब घुप्प अमावस के द्वारेकुछ किरणें दस्तक देती हैं,सब संग मिल लोहा लेती हैं,कुछ शब्द, सूरज बन जाते हैं, तब नई सुबह हो जाती है,नन्ही कलियां मुसकाती हैं,हर पल नूतन हो जाता है,हर पल उत्कर्ष मनाता है, तब मेरे मन की कुंज गलिन मेंइक भौंरा रसिया गाता है,पल-छिन…

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क्या गंगा को सिर्फ चुनावी वाहन मानने वालों को अपना प्रतिनिधि चुनें ?

गंगा के सहारे चुनावी नौका पार करना, 2014 के प्रधानमंत्री पद के दावेदार श्री मोदी का एजेण्डा था। 2019 चुनाव में अब यह राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की अपील करने वाली प्रियंका गांधी का एजेण्डा है।

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पुलवामा घात में अमर हुए सी आर पी एफ के शहीदों को नमन करते हुए एक गंगा प्रश्न

उन को वंदन, उन पर क्रंदन,
बदला-बदले की आवाज़ें,
शत्-शत् करती मैं उन्हे नमन्,
पर इन पर चुप्पी कितनी जायज़,
खुद से पूछो, खुद ही जानो,
खुद का करतब पहचानो,
मैं गंगा तुम से पूछ रहीं…

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जल सुरक्षा अधिकार विधेयक प्रारूप पर डॉ. चन्दरशेखर प्राण के महत्वपूर्ण सुझाव

मेरी टिप्पणी मुख्य रूप से अंग्रेजी ड्राफ्ट को लेकर है  :1.      हिंदी और अंग्रेजी दोनों में एक्ट के शीर्षक को लेकर भिन्नता है. अंग्रेजी में इसे River Conservation...

जाओ, मगर सानंद नहीं, जी डी बनकर - अविमुक्तेश्वरानंद

स्वामी सानंद गंगा संकल्प संवाद – 10वां कथनप्रस्तुति: अरुण तिवारी प्रो जी डी अग्रवाल जी से स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी का नामकरण हासिल गंगापुत्र की एक पहचान आई आई...
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