Tag: हिमालय

मैं झरना हूं …

देख मुझे खिलखिला उठी, गट्ठर फेंका, अंजुरी बांधी, प्रेम पगी दृष्टि साधी, फिर ओंठों से मेरा पान किया, चन्द्र चकोरी मुख स्नान किया, वह सींच रही थी खुद को...

एक गीत, गंगा- यमुना जी को ‘जीवित माँ ‘ का कानूनी दर्जा

फिर तुम लिखो या न लिखो, मैं खुद लिखूँगी कैफ़ियत ज़िंदा कि मुर्दा मात, देवी या कि महरी क्या हैसियत मेरी जहां…