एक गीत, गंगा- यमुना जी को ‘जीवित माँ ‘ का कानूनी दर्जा
फिर तुम लिखो या न लिखो, मैं खुद लिखूँगी कैफ़ियत ज़िंदा कि मुर्दा मात, देवी या कि महरी क्या हैसियत मेरी जहां…
फिर तुम लिखो या न लिखो, मैं खुद लिखूँगी कैफ़ियत ज़िंदा कि मुर्दा मात, देवी या कि महरी क्या हैसियत मेरी जहां…