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पानी प्रणय पक्ष

लेखक : अरुण तिवारी आतुर जल बोला माटी सेमैं प्रकृति का वीर्य तत्व हूं,तुम प्रकृति की कोख हो न्यारी।इस जगती का पौरुष मुझमें,तुममें रचना का गुण भारी।नर-नारी सम भोग विदित जस,तुम रंग बनो, मैं बनूं बिहारी।आतुर जल बोला माटी से…. न स्वाद गंध, न रंग तत्व,पर बोध तत्व है अनुपम…

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