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Uncategorized, आज का लेख, नदी लेख, समय विशेष

चैत्र नवरात्र पर विशेष : भूले नहीं कि एक मां गंगा भी है

   लेखक: अरुण तिवारी   नया संवत्सर आया है। नवीन रातें आई हैं। नवरात्रों में हम मां के अनेक रूपों को पूजते हैं। मां से अनेक आकांक्षाओं की पूर्ति की अपेक्षा रखते हैं। गो, गंगा, गायत्री, तुलसी, पृथ्वी – भारतीय परंपरा ने पालन-पोषण करने वाली ऐसी कई शक्तियों को मां माना है। क्या कभी हम इन माताओं  से भी पूछते हैं…

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जन जुङे, तब विनाश रुके

अभी लोग सोचते हैं कि नदियां सरकार की हैं। समस्या का समाधान भी सरकार ही करेगी। यह सोच ही समाधान के मार्ग में सबसे बङी बाधा है। यह सोच बदलनी होगी। सोच बदली तो ये लोग ही सरकारों को बता देंगे कि तात्कालिक योजना बाढ राहत की जरूर हो, लेकिन दीर्घकालिक योजना बाढ निवारण की ही बने। वे यह भी…

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बाढ़ नहीं, इसकी तीव्रता व टिकाऊपन से डरें

लेखक : अरुण तिवारी बाढ़ के कारणों पर चर्चा के शुरु में ही एक बात साफ कर देनी जरूरी है कि बाढ़ बुरी नहीं होती; बुरी होती है एक सीमा से अधिक उसकी तीव्रता तथा उसका जरूरत से ज्यादा दिनों तक टिक जाना। बाढ़, नुकसान से ज्यादा नफा देती है।   “वे भाग्यशाली हैं, गंगा मैया खुद चलकर जिनके द्वार आयी है”- बिहार…

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एक चिट्ठी, धर्माचार्यों के नाम

संदर्भ: मूर्ति विसर्जन पर प्रधानमंत्री जी  के मन की बात 01-09-2016   सभी आदरणीय धर्माचार्यों को प्रणाम।    मूर्ति विसर्जन से नदी प्रदूषण के मसले को लेकर ’मन की बात’ कहते हुए प्रधानमंत्री जी ने प्लास्टिक आॅफ पेरिस की बनी मूर्तियों का इस्तेमाल न करने का जो आहवा्न किया है, निश्चित ही वह प्रशंसनीय है, लेकिन हमें इससे आगे बढ़ने की जरूरत है।…

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हानिकारक रसायनों पर सजगता व सख्ती ज़रूरी

लेखक: अरुण तिवारी पोटेशियम ब्रोमेट एक ऐसा रसायन है, जिसके कारण इंसान में पेट का कैंसर, गुरदे में ट्युमर, थायोराइड संबंधी असंतुलन तथा तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारियां होने की संभावना रहती है। इसे कैंसर संभावित रसायनों की 2बी श्रेणी में रखा गया है। पोटेशियम आयोडेट से थायोरायड संबंधी असंतुलन पैदा होने का खतरा होता है; बावजूद इन ज्ञात खतरों के…

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अवैध खनन को नियमित करने में जुटे हरीश रावत : गंगा का क्या होगा ??

प्रेस विज्ञप्ति दिनांक 25 जुलाई, 2016, मातृसदन, हरिद्वार विरोध करेगा  मातृसदन  यह प्रमाणित तथ्य है कि गंगाजी में एक भी पत्थर उपर से बहकर / लुढ़कर हरिद्वार में नहीं आता है। इस बात को स्वयं केन्द्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, नई दिल्ली ने जाँच में प्रमाणित किया है। वर्ष 2011 एवं पुनः 2012 में माननीय उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय…

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वर्तमान कानून गंगा रक्षा में विफल

लेखक : परितोष त्यागी (पूर्व अध्यक्ष, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड )  वर्ष 1986 से गंगा जी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए गंगा एक्शन प्लान नाम की योजना पर काम हो रहा था. अब नमामि गंगे नामक कार्यक्रम में 200 से अधिक प्रोजेक्ट पर काम किया जायगा. गंगा एक्शन प्लान की असफलता सर्व विदित है. नमामि गंगे के लिए प्रस्तावित धनराशि…

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उमा जी सामने होती, तो गर्दन पकङ लेता : स्वामी सानंद

प्रस्तोता: अरुण तिवारी(यह प्रस्तुति, इसी जुलाई के दूसरे सप्ताह में स्वामी सानंद से हुई बातचीत के अंशों पर आधारित है )21वें कथन के साथ ‘स्वामी सानंद गंगा संकल्प संवाद श्रृंखला’ संपन्न हुई, तो अलग-अलग सवाल कई के मन में उठे; गांधी शांति प्रतिष्ठान के आदरणीय रमेश भाई, यमुना जिये अभियान के श्री मनोज मिश्र, नदियों के हालात से निराश डाॅ….

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पानी दूर हुआ या हम ?

लेखक: अरुण तिवारी ग्लेशियर पिघले। नदियां सिकुङी। आब के कटोरे सूखे। भूजल स्तर तल-वितल सुतल से नीचे गिरकर पाताल तक पहुंच गया। मानसून बरसेगा ही बरसेगा.. अब यह गारंटी भी मौसम के हाथ से निकल गई है। पहले सूखे को लेकर हायतौबा मची, अब बाढ़ की आशंका से कई इलाके परेशान हैं। नौ महीने बाद फिर सूखे को लेकर कई…

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प्रतापगढ़ में भूजल संगोष्ठी

फोटो एवम् जानकारी स्त्रोत : आर. के. गुप्ता – सहायक अभियंता (लघु सिंचाई), प्रतापगढ़, उ.प्र. पानी के बिना जीवन सम्भव नही – मुख्य विकास अधिकारीहर वर्ष की तरह उत्तर प्रदेश शासन इस  वर्ष भी भूजल सप्ताह मना रहा है। 16 से 22 जुलाई के इस सप्ताह में प्रदेश में प्रत्येक जिले में गोष्ठियों आदि का आयोजन किया जाता है। इसी के तहत् 20…

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