अवधी गीत *अमेठी कय पानी
रचनाकार : अरुण तिवारी

अमेठी कय पानी, अमेठी कय पानी,
मरी गवा कुआं, झुराय गय तलिया,
पुर औ दुगला हेराय गयें भाय सब,
बुढ़ाय गवा इंजन, अब समर कय जवानी,
कबौ भरि-भरि ऊसर, अब झूरा से हैरानी,
खेते-खेते धान तबौ, जोंधरी-बजरी हम कीन बेगानी।
अरे मोर दइया, कहा पांडे़ बप्पा, कब तक चले ई हमार नादानी ?
अमेठी कय पानी, अमेठी कय पानी…
समदा अस ताल अहै, गऊ अस घाट बा,
तबौ पे भादर, संग्रामपुर, नगरराम खार बा,
बहादुरपुर-छूलामऊ फ्लोरिसिस से हैरान बा,
पहिले नाहर आई अब नल कय गुलामी,
वी वी आई पी नाम कय, न राजा न रानी।
अरे मोर दइया, कहा पांडे़ बप्पा, कब तक चले ई हमार नादानी ?
अमेठी कय पानी, अमेठी कय पानी…
परोजने मा केन सजी, आर ओ स्कूल-घरे,
रेलनीर कोकाकोला सिनवा पर चढ़ाय लेहेन,
खींचेन बहुत मुला भरय नाहीं जानेन,
तलाव के नाम पे चारदीवारी बनाय देहेन,
रूठत अहै गागर, हेरात अहै पानी।
अरे मोर दइया, कहा पांडे़ बप्पा, कब तक चले ई हमार नादानी ?
अमेठी कय पानी, अमेठी कय पानी…
गोमती मलिन कीन, सई का सराय देहे,
मालती झुरात बाटीं, अकल सब हेराय गई,
माई उज्जयिनिव का ड्रेन लिखाय देहे,
जौन रहा झाड़-जंगल ओहू का कटाय देहे,
चर्चा-परिचर्चा कागज़ कय नदिया दौड़ाय देहे।
अरे मोर दइया, कहा पांडे़ बप्पा, कब तक चले ई हमार नादानी ?
अमेठी कय पानी, अमेठी कय पानी…

संपर्क :
amethiarun@gmail.com
(9868793799)
2 thoughts on “अवधी गीत *अमेठी कय पानी”
सुंदर गीत। अब यादों में ही बचे हैं ताल तलैया ।
😔
अति सुन्दर रचना ,
जल स्तर धीरे धीरे नीचे जा रहा है , कुएं सूख गये है नहर तालाब में मे पानी ही नही है। जल का दोहन खूब हो रहा है !
प्रकृति खेलवाड़ जो सब कर रहे हैं , ये भविष्य के लिए बहुत घातक सिद्ध होगा !
ईश्वर से कामना करता हूं आपका सभी का प्रयास जन आन्दोलन बने !
तालाब में पानी संचय हो , नहर नदिया साफ , और उसमे पानी हो ! जल ही जीवन है – सभी महत्व को समझें !