नदी गीत – बोल, पैर कुल्हाड़ी फिर क्या होगा ?
अरुण तिवारी 🍁 गंगा शिव हैं औघड़, हिम राजा है,पर इनका गहरा नाता है।पार्वती को प्रिया बनाया,गंगा को सिर पर बैठाया।बड़ी मिन्नतें की भागीरथ...
अरुण तिवारी 🍁 गंगा शिव हैं औघड़, हिम राजा है,पर इनका गहरा नाता है।पार्वती को प्रिया बनाया,गंगा को सिर पर बैठाया।बड़ी मिन्नतें की भागीरथ...
अरुण तिवारी नदियां इस धरती की नस हैं,इनमे बहते पंचम रस हैं। नदी किनारे, फिर भी प्यासे,वे असभ्य बड़े अभागे होंगे,निज लालच में आगे...
शायर : अरुण तिवारी कौन कहता है कि नदियों में पानी बहा करता है,मां जना इतना भी नहीं जानता किजहां ममता की लहरें उठती...
फिर तुम लिखो या न लिखो, मैं खुद लिखूँगी कैफ़ियत ज़िंदा कि मुर्दा मात, देवी या कि महरी क्या हैसियत मेरी जहां…
सुनो-सुनो ऐ दिल्ली वालो, तुम्हे कसम है यमुना जी की, अमृत में तुम विष मत डालो अपने नाले खुद संभालो। वरना विष से भर जाओगे, जीते-जी तुम मर जाओगे, छठ...
रेत सोख्ता चाहिए, करबद्ध करौ उपाय। वेग-ढाल नदी प्राण हैं, सुन लो यार मन लाय।।
कहते हैं, इन दिनों धरती बेहद उदास है। इसके रंजो-ग़म के कारण कुछ ख़ास हैं।
अमेठी जनपद के रेल नीर का कार्यरत तथा कोका कोला शीतल पेय का मंजूर संयंत्र ऐसे प्रखण्डों में लगे हैं, जहां पहले ही भूजल...
कह रहे हैं कि हम गंगा के सीने पर गंगा एक्सप्रेस-वे बना सकते हैं; हिमालय का सीना चीरकर चारधाम सड़क बना सकते हैं। हम...
बाढ़ के कारणों पर चर्चा के शुरु में ही एक बात साफ कर देनी जरूरी है कि बाढ़ हमेेशा बुरी नहीं होती; बुरी होती है एक सीमा...