Category: आज का लेख

मैं झरना हूं …

देख मुझे खिलखिला उठी, गट्ठर फेंका, अंजुरी बांधी, प्रेम पगी दृष्टि साधी, फिर ओंठों से मेरा पान किया, चन्द्र चकोरी मुख स्नान किया, वह सींच रही थी खुद को...

नदी गीत – मन मत करना अब तू मनमानी…

अरुण तिवारी नदियां इस धरती की नस हैं,इनमे बहते पंचम रस हैं। नदी किनारे, फिर भी प्यासे,वे असभ्य बड़े अभागे होंगे,निज लालच में आगे...

तालाब जितना बनाना जरूरी, उतना बचाना भी. आख़िरकार क्यों ?

" सिर्फ पाइप बिछाकर, हर घर में नल लगाकर और पानी की बड़ी-बड़ी टंकियां बनाकर हम सभी के लिए स्वच्छ और सुचारू जलापूर्ति सुनिश्चित...

एक गीत, गंगा- यमुना जी को ‘जीवित माँ ‘ का कानूनी दर्जा

फिर तुम लिखो या न लिखो, मैं खुद लिखूँगी कैफ़ियत ज़िंदा कि मुर्दा मात, देवी या कि महरी क्या हैसियत मेरी जहां…

सुनो-सुनो ऐ दिल्ली वालो…

सुनो-सुनो ऐ दिल्ली वालो, तुम्हे कसम है यमुना जी की, अमृत में तुम विष मत डालो अपने नाले खुद संभालो। वरना विष से भर जाओगे, जीते-जी तुम मर जाओगे, छठ...